Tuesday, December 7, 2021

Drugs Case: समीर दाऊद वानखेड़े का निकाहनामा किया शेयर नवाब मलिक ने

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Mumbai Drugs Case: जैसे जैसे दिन बीत रहे है वैसे ही ये केस और पेचीदा होता जा रहा है। एक तरफ Aryan Khan की ज़मानत याचिका पर बाते हो रही तो दूसरी ऒर इस केस की जाँच कर रहे (NCB) के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े (Sameer Wankhede) पर लगातार आरोप लग रहे हैं। NCP के मंत्री नवाब मलिक (Nawab Malik) लगातार ट्वीट्स और प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से समीर वानखेड़े को घेर रहे हैं।

जिसे लेकर मंगलवार को समीर वानखेड़े की पत्नी क्रांति रेडकर ने भी बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मेरे पति झूठे नहीं हैं ईमानदार हैं। वहीं फिर से नवाब मलिक ने समीर वानखेड़े को लेकर एक ट्वीट किया है। इस ट्वीट में Nawab ने निकाहनामा (Marriage cretificate) को शेयर किया है। साथ उन्होंने लिखा है कि ये समीर दाऊद वानखेड़े का निकाहनामा है जो कि डॉ शबाना कुरैशी के साथ हुई थी। 7 दिसंबर 2006 को समीर दाऊद वानखेड़े और शबाना कुरैशी के बीच लोखंडवाला कॉम्पलेक्स, अंधेरी वेस्ट मुंबई में निकाह हुआ था।

Nawab Malik के इस आरोप पर समीर वानखेड़े की पत्नी क्रांति वानखेड़े ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अपने पति को ईमानदार बताया और उन पर आरोपों को झूठा कहा है। क्रांति ने कहा, हम बहुत साधारण लोग हैं। मेरे पति की काम की शैली से कुछ लोगों को परेशानी हो रही है। वह बहुत ईमानदार अफसर हैं। मुझे महाराष्ट्र सरकार पर पूरा भरोसा है कि वह सच के साथ खड़ी होगी।

इस मामले में हम रोज रोज प्रूफ देकर परेशान हो चुके हैं। क्रांति ने ट्वीट करके ये भी कहा कि मैं और मेरे पति समीर जन्म से हिंदू हैं। हमने धर्म परिवर्तन कभी नहीं किया। हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं। समीर के पिता भी हिंदू हैं जिन्होंने मुस्लिम महिला से शादी की समीर की पहली शादी स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत हुई थी और 2016 में तलाक हुआ था। हमारी शादी हिन्दू मैरिज एक्ट के तहत 2017 में हुई थी।

वहीं नवाब मलिक ने कहा कि सवाल तो ये हैं कि उस व्यक्ति ने अनुसूचित जाति के फर्जी सर्टिफिकेट के जरिए नौकरी हासिल की और गरीब का हक मारा उसके पिता ज्ञानेश्वर वानखेड़े अनुसूचित जाति के हैं और उन्होंने मुस्लिम महिला से शादी की तो उन्होंने मुस्लिम धर्म का ही पालन किया। समीर के पिता जन्म से दलित थे, लेकिन बाद में शादी के बाद धर्म परिर्वतन किया। जब कोई मुस्लिम या किसी भी अन्य धर्म में परिवर्तन करता है, तो उसका अपने पुराने जाति से कोई लेना-देना नहीं होता है। लेकिन समीर वानखेड़े ने इसका इस्तेमाल आरक्षण के लिए किया है।

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