Monday, October 25, 2021

 

 

 

अंधेरे में गुजारनी पड़ेगी जिंदगी बिजली मुक्त हो रहा है भारत

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कोविड-19 की दूसरी लहर के बाद अर्थव्यवस्था मैं थोड़ी तेजी आई है और बिजली की मांग भी अचानक बढ़ी है बीते 2 महीनों में बिजली की खपत 2019 के मुकाबले 17% बढ़ गई है। भारत में 70 फ़ीसदी से अधिक बिजली का उत्पाद कोयले से होता है ऐसे में चिंता का विषय यह है क्योंकि इस महामारी के बाद पटरी पर लौट रही अर्थव्यवस्था फिर से पटरी से उतर सकती है क्योंकि भारत में दुनिया का चौथा सबसे बड़ा कोयले का भंडार है लेकिन खपत की वजह से कोयले का आयात करने में दुनिया में दूसरे नंबर पर।

विशेषज्ञों का मानना है इस समय अधिक कोयला आयात करना भारत के लिए अच्छा विकल्प नहीं। यदि कोई कंपनी महंगे दाम में कोयला खरीद रही है तो आगे महंगे दाम में देगी और कारोबारी ग्राहक को महंगे दाम में देगा जिससे कि महंगाई बढ़ सकती है।

भारत के ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने अखबार इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में कहा है मौजूदा परिस्थिति जोखिम भरी है अब भारत को अगले 5-6 महीने के लिए तैयार रहना चाहिए।

भारत में 80% कोयला उत्पादन करने वाले सरकारी उपक्रम कोल इंडिया लिमिटेड की पूर्व प्रमुख जोहरा चटर्जी कहती हैं कि यदि स्थिति ऐसी ही बनी रही तो एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था पटरी पर लौटने के लिए संघर्ष करेगी जोहरा कहती हैं बिजली से ही हर चीज चलती है ऐसे में पूरा उत्पाद सेक्टर सीमेंट स्टील कंस्ट्रक्शन सब कोयले की कमी से प्रभावित होते हैं वह मौजूदा परिस्थिति को भारत के लिए एक चेतावनी की तरह बताती हैं और कहती हैं अब समय आ गया जब भारत कोयले पर अपनी निर्भरता कम करें और अच्छी ऊर्जा रणनीति पर आक्रामकता से आगे बढ़े।

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