महंगाई से हुवा बुरा हाल ग्रामीण परेशान जरूरी चीजों के दाम शहर से भी ज्यादा

इस साल 2021 अक्टूबर में महंगाई के आकड़ों की जहंच हुई तो पाया गया की गांवो के मुकाबले शहर में ज़्यादा महंगाई थी लेकिन इसके बाद भी गांवों में कई जरूरी चीजों के दाम शहरों के मुकाबले काफी ज्यादा थे। इनमें खाने पीनी की चीजों से लेकर रोजमर्रा के इस्तेमाल की भी वस्तुएं शामिल हैं। साथ ही देश के कई राज्यों में राष्ट्रीय औसत से महंगाई दर ज्यादा नजर आ रही है। आंकड़ों के मुताबिक, देश के ग्रामीण इलाकों की महंगाई दर 4.07 प्रतिशत तो वहीं शहरी क्षेत्र में ये आंकड़ा 5.04 फीसदी पर रहा है।

इनमें कई जरूरी और खाने पीने से जुड़ी चीजें जैसे अनाज और उससे जुड़े उत्पाद, मांस और मछली, अंडे, तेल और घी, दालें, चीनी, मसाले और कपड़े-चप्पल के दाम पिछले साल के मुकाबले काफी बढ़े हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई सीधे तौर पर मांग और आपूर्ति के हिसाब से बढ़ती घटती रहती है। साथ ही आज के दौर में ट्रांसपोर्टेशन भी दाम बढ़ाने में योगदान देता है।

ग्रामीण इलाकों में सामान पहुंचाना, शहरी इलाकों की तुलना में ज्यादा खर्चीला हो जाता है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल अक्टूबर के मुकाबले इस साल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक महंगाई दर तो घटी है लेकिन सितंबर महीने के मुकाबले इसमें इजाफा देखा गया है। सितंबर में 4.35 के मुकाबले अक्टूबर में महंगाई दर 4.48 प्रतिशत पर है।
वहीं पिछले साल ये आंकड़ा 7.61 फीसदी पर था।

हराइच के ग्रामीण क्षेत्रों के दुकानदारों का कहना है कि वे लोग शहर से माल उठाते हैं। वहां से गांव तक पहुंचाने में भाड़ा, खर्चा बढ़ने से दाम बढ़े हैं। अयोध्या जनपद में शहर की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई में काफी इजाफा हुआ है। वहां टमाटर 90 रुपये किलो तक बिक रहा है। सीतापुर में महंगाई बढ़ने का मुख्य कारण माल ढुलाई के भाड़े में बढ़ोतरी है। लोग इसे तेल की बढ़ती कीमतों से जोड़ रहे हैं। थोक की मण्डी से जिले की फुटकर मण्डियों तक पहुंचने के बाद तीन माह में दालें 15 फीसद महंगी हुई हैं। सीतापुर में हरी मिर्च और हरी धनिया के भाव तीस प्रतिशत बढ़े हैं।

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