Saturday, December 4, 2021

आर्यन खान की जमानत पर अब कल होगी सुनवाई, रोहतगी ने दी आज ये दलीलें

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आर्यन खान की जमानत याचिका पर बॉम्‍बे हाई कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है। लंबे इंतजार के बाद 4 बजकर 21 मिनट पर सुनवाई शुरू हुई। आर्यन खान के लिए पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी पैरवी कर रहे हैं। जस्‍ट‍िस नितिन साम्‍ब्रे की अदालत में NCB के वकील ASG अनिल भी मौजूद हैं।

मुकुल रोहतगी ने अपनी दलील में आर्यन की ग‍िरफ्तारी को अवैध बताया है। उन्‍होंने वॉट्सऐप चैट का जिक्र करते हुए कहा कि वह पुराने चैट्स हैं, उनका क्रूज केस से कोई लेना-देना नहीं है। रोहतगी ने कहा कि आर्यन के पास से न तो ड्रग्‍स मिले हैं और न ही उन्‍होंने उस दिन ड्रग्‍स का सेवन किया था, फिर उन्‍हें 23 दिनों से जेल में बंद क्‍यों रखा गया है? अरबाज के पास कुछ मिला भी है तो इससे आर्यन का क्‍या मतलब। आर्यन के वह दोस्‍त हैं नौकर नहीं। 4 बजकर 25 मिनट पर देसाई ने जज से कहा कि उनके जूनियर और कुछ जरूरी कागजात बाहर छूट गए हैं। जज ने कहा कि आप आवाज लगा दें, दरवाजे तक जाकर भी कागजात लिए जा सकते हैं।

मुकुल रोहतगी ने अपनी बात शुरू करते हुए कहा: मैं अपनी कोश‍िश करते हुए संक्षेप में बात रखने की कोश‍िश करता हूं। उनकी उम्र 23 साल है। वह कैलिफोर्निया, यूएसए में थे। नई कहानी 2 अक्टूबर से शुरू होती है। बॉम्बे से गोवा जाने के लिए एक क्रूज था, आर्यन खान को एक गेस्‍ट के तौर पर क्रूज पर आमंत्रित किया गया था। उन्हें प्रतीक गाबा ने इन्‍वाइट किया था। वह खान और अरबाज मर्चेंट को जानता था। तो खान और मर्चेंट को बुलाया गया।

2 अक्टूबर की दोपहर को विज्ञापन के मुताबिक वह क्रूज टर्मिनल पर पहुंचे। ऐसा लगता है कि एनसीबी को पहले से सूचना थी कि लोग ड्रग्स ले जा रहे होंगे। इसलिए एनसीबी ने अधिकारियों को भेजा ताकि वो ऐसे लोगों को पकड़ सकें। रोहतगी ने आगे कहा: आर्यन खान और मर्चेंट को गिरफ्तार किया गया। आर्यन खान से कोई रिकवरी नहीं हुई थी और यह दिखाने के लिए कोई मेडिकल जांच नहीं हुई थी कि उन्‍होंने ड्रग्‍स का सेवन किया है। मर्चेंट के पास 6 ग्राम चरस थी जो उसके जूतों से बरामद की गई। मर्चेंट इससे इनकार कर रहा है।

हमें इसकी चिंता नहीं है, सिवाय इसके कि वह आर्यन के दोस्त हैं। जहां तक आर्यन की बात है। उनके पास से कोई जब्‍ती नहीं हुई है। कोई सेवन नहीं हुआ है। कोई मेडिकल टेस्ट नहीं हुआ। मेरे मुवक्किल के खिलाफ कुछ भी नहीं है। उसे 3 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था। धारा 67 के तहत एक बयान दर्ज किया गया था, जिसे अगली तारीख को वापस ले लिया गया था।

मुकुल रोहतगी: जहां तक एनडीपीएस का सवाल है, हमने इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट में उठाया था। हमने इस मुद्दे को विशेष अधिनियमों की कई याचिकाओं में उठाया था। क्योंकि ये अधिकारी हैं पुलिस नहीं। मैं तूफान सिंह केस में कोर्ट के फैसले का जिक्र करूंगा। जस्टिस नरीमन कोर्ट में कहते हैं‍ कि एनडीपीएस अधिकारी अधिनियम के तहत जो बयान दर्ज करता है, वह अदालत में स्वीकार्य नहीं है। एनडीपीएस अधिकारियों को दिए गए बयान अस्वीकार्य हैं। अब क्‍योंकि इस मामले में कोई जब्‍ती नहीं है, मैं कहना चाहता हूं कि मुझे गलत तरीके से गिरफ्तार किया गया है।

रोहतगी ने आगे कहा: मैंने मजिस्ट्रेट का रुख किया, उन्होंने कहा कि जमानत उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर जाएं। फिर हम जिला अदालत चले गए। जिसे खारिज कर दिया गया। यहां कोई सेवन नहीं हुआ है। कोई बरामदगी नहीं है। मेरे खिलाफ यह तर्क दिया गया कि आप अरबाज मर्चेंट के साथ आए थे, इसलिए आपके पास कॉन्‍शस पजेशन था। वो कहते हैं कि यह मुझे पता था। उनके पास मेरे ख‍िलाफ कुछ नहीं है। इसलिए वो ऐसी बातें कर रहे हैं। किसी के पास उसके जूते में क्‍या है, यह मेरी प्रॉब्‍लम का नहीं है।

रोहतगी ने कहा: मैं एक पुराना फैसला सामने रखना चाहूंगा। तो मेरे ख‍िलाफ सिर्फ ये एक कॉन्‍शस पजेशन का मामला है। ऐसा नहीं है कि वहां कोई पार्टी चल रही थी और लोग ड्रग्‍स का सेवन कर रहे थे। तो मेरे मुवक्किल को क्यों निशाना बनाया गया? जो बरामद हुआ, वह 6 ग्राम की छोटी मात्रा है। यह कोई कर्मश‍ियल क्‍वांटि‍टी नहीं है। इसलिए यह भी मुझे हिरासत में रखने के लिए काफी नहीं है। बहुत से लोगों के पास से कर्मश‍ियल मात्रा में ड्रग्‍स मिले हैं। मेरे खिलाफ कोई धारा 27ए भी नहीं है। 27A तस्करी का है। फिर धारा 29, क्योंकि मर्चेंट के पास पदार्थ पाया गया। मैं मर्चेंट के अलावा किसी को नहीं जानता। तो साजिश का आरोप कैसा। मेरे मामले में धारा 37 लागू नहीं हो सकती। लेकिन सत्र अदालत ने 37 और साजिश को सही ठहराया है। इस मामले में मेरा ऐसा कोई पूर्व अपराध नहीं है।

रोहतगी: जो वॉट्सऐप दिखाए गए हैं, वो 2018 के थे। कोई भी चैट क्रूज से संबंध‍ित नहीं है। ऐसा कोई मामला नहीं है जहां चैट का इस केस से कोई लेना-देना हो। उन चैट को, हमें जांच कर के देखना होगा, साबित करना होगा। चैट का मौजूदा मामले से कोई लेना देना नहीं है। लिहाजा, साजिश जैसे शब्‍द का इस्‍तेमाल करना भी सही नहीं है। पंचनामा पढ़ता हूं। साजिश के मकसद से भी मान लीजिए कि 5-10 लोगों ने पहले ही तय कर लिया था कि वह जहाज पर जाएंगे। तो यहां मन मिलने की बात है। लेकिन क्या होगा अगर प्रोग्राम बना ही नहीं? कथ‍ित तौर पर सेवन की बात हो रही है। यहां धूम्रपान की बात नहीं है, कोई पार्टी नहीं है, मेरे मामले में केवल कॉन्‍शस पजेशन है।

‘एनसीबी विवाद से मेरा कोई लेना-देना नहीं, मुझे कोई श‍िकायत नहीं’
रोहतगी बोले: मेरा अरबाज मर्चेंट को छोड़कर किसी अन्य के साथ सेवन या बिक्री या खरीद या कोई संबंध का कोई मामला नहीं है। जबकि अरेस्‍ट मेमो से ऐसा लगता है कि जैसे मैं ड्रग्स ले जा रहा था। कुछ बेहूदा विवाद हैं, लेकिन मैं अपने जवाब में स्पष्ट कर देता हूं कि मैं पंच 1 (वीके गोसावी) और 2 (प्रभाकर सैल) से जुड़ा नहीं हूं। विवाद खड़ा हुआ तो पंच 2 के हलफनामे से बेबुनियाद आरोप लगाते हुए वह हलफनामा दाखिल किया गया। समीर वानखेड़े ने जवाब में कहा कि यह एक राजनीतिक पर्सनैलिटी के साथ दुश्मनी के कारण है, जिनके दामाद को गिरफ्तार किया गया था (नवाब मलिक), आज जो कहा जा रहा है वह मुझ पर पलटवार करने जैसा है। कृपया मुझे उस विवाद से दूर रखें। मैं स्पष्ट कर रहा हूं कि मेरे पास किसी भी एनसीबी अधिकारी के खिलाफ कुछ भी नहीं है। मुझे कोई शिकायत नहीं है। कृपया पंचनामा देखें, धारा 35 आपराधिक मानसिक स्थिति है, यह अपराध नहीं है। मोबाइल फोन भी बरामद नहीं हुआ है।

जस्टिस साम्ब्रे: तो मोबाइल फोन की जब्ती नहीं हुई? व्हाट्सएप चैट के बारे में क्या?
रोहतगी: नहीं, फोन की जब्ती के लिए कोई पंचनामा नहीं है। वॉट्सऐप चैट क्रूज या साजिश से संबंधित नहीं हैं। वे पुरानी चैट हैं।

‘साजिश तो तब होती न जब सभी 20 लोगों की मिलीभगत होती’
रोहतगी: आरोपी नंबर 17 (अच‍ित कुमार), उस क्रूज पर नहीं था, जिसका नाम खान और मर्चेंट ने लिया था। उसे छह अक्टूबर को उसके घर से गिरफ्तार किया गया था। अधिकारियों को जानकारी मिली थी कि उसके पास कुछ है। लेकिन वह 2.6 ग्राम के साथ मिला! इस अधिकतम वसूली के बाद आप मुझे, मर्चेंट और आरोपी 17 (अचित) से जोड़ सकते हैं। लेकिन मैं किसी और से नहीं जुड़ा हूं। साजिश तब होती है, जब सभी गिरफ्तार 20 लोग पहले मिल चुके हों और सभी के मन का पहले से मेल हो।

जो चैट सामने रखे जा रहे हैं। ये सभी चैट, क्रूज पर नहीं हैं। कुछ क्रूज पर हैं, कुछ नहीं हैं। लेकिन यह मेरी चिंता नहीं है। मैं कह रहा हूं कि मेरे खिलाफ कोई केस नहीं है। एक 17 साल का युवा कॉलेज का बच्चा है। जो आर्यन खान के साथ ऑनलाइन पोकर खेल रहा था। चैट पर जो मेसेज भेजे गए हैं, वो आपके हिसाब से कनेक्शन दिखा रहे हैं। लेकिन यह पोकर गेम के बारे में चर्चा से आगे कुछ भी नहीं है। खान से चैट के बारे में पूछा गया और उन्‍होंने कहा कि वह ऑनलाइन गेम के कारण उसे जानते हैं। आजकल ऑनलाइन गेमिंग का बहुत चलन है। मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं, क्योंकि ऑनलाइन गेम को चुनौती देने वाली याचिकाएं हैं। मैं कह रहा हूं उसमें यह दिखाने के लिए कुछ भी नहीं है कि मैं अवैध तस्करी कर रहा था।

रोहतगी ने कोर्ट में दिया इन अदालती फैसलों का हवाला
रोहतगी ने इसके बाद कोर्ट में एक के एक कई केसेज का हवाला दिया। उन्‍होंने कहा, ‘मैं सम्मानपूर्वक निवेदन करता हूं कि मेरे पास सभी मामलों से बेहतर मामला है, मैं इनका हवाला दे रहा हूं, क्योंकि आर्यन के पास से ड्रग्‍स की बरामदगी नहीं हुई है। जस्टिस पिटाले का फैसला है। रणवीर और शानू के केस में। रणवीर सिंह बनाम महाराष्ट्र राज्य और शानूब केएच बनाम राज्य। मैं एक महत्वपूर्ण निर्णय दिखाता हूं। रागिनी द्विवेदी बनाम कर्नाटक राज्य। मैं अब आपकी ही अदालत के फैसले का जिक्र करता चाहता हूं, जो सोहेल समीर बनाम महाराष्ट्र राज्य का है। मैं एक बॉम्बे हाईकोर्ट के राजेश वजानी का फैसला का भी पटल पर रखता हूं। मैं यही कहना चाहता हूं कि अरबाज मर्चेंट के जूते में क्या मिला, यह आर्यन के कंट्रोल में नहीं था। अरबाज उनका नौकर नहीं है, वह उनके कंट्रोल में नहीं है, इसलिए यहां कोई साजिश नहीं है। अंत में मैं जस्टिस डांगरे के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश पढ़ता हूं।

मुकुल रोहतगी ने इसके बाद ड्रग्स कंजम्‍पशन पर सामाजिक न्याय मंत्रालय की टिप्पणी से संबंधित ‘इंडियन एक्सप्रेस’ का एक लेख कोर्ट को सौंपा। कहा कि यह मामला आर्यन के माता-पिता की वजह से मीडिया के लिए भी अहम है।

रोहतगी: एनसीबी के जवाब में अब इस पैराग्राफ 4 में मैनेजर (पूजा ददलानी) का जिक्र है। मैंने यह कहते हुए एक प्रत्युत्तर दाखिल किया कि मैं अधिकारियों या पंचों के खिलाफ कोई आरोप नहीं लगा रहा हूं और मेरा कोई संबंध नहीं है। मैं सम्मानपूर्वक निवेदन कर रहा हूं कि मैं कोई आरोप नहीं लगा रहा हूं। इस भद्दे कमेंट को छोड़कर, क्‍योंकि यह एक सामान्य मामला है। मैं सम्मानपूर्वक निवेदन करता हूं कि यह मामला जमानत के लिए है।

अरबाज मर्चेंट की ओर से अमित देसाई ने की कोर्ट में जिरह की। इस बीच एडवोकेट सुभाष झा ने एक ‘हस्तक्षेप आवेदन’ भी दायर किया है। झा ने कहा, ‘यह प्रारंभिक आवेदन है और वह बार के सदस्यों द्वारा भी है। कोर्ट में 100 के अध‍िक मामले लंबित हैं, लेकिन अदालत ने इस जमानत याचिका को प्रायरिटी दी है। इस पर कोर्ट ने कहा, ‘मिस्टर झा, आप रोज मेरे कोर्ट में हाजिर होते हैं। मैं अपना बोर्ड पूरा किए बिना नहीं उठता। जो कोई भी कोर्ट में आता है उसकी सुनवाई होती है।’ वकील सुभाष झा ने कहा, ‘आप 20 अक्टूबर जल्‍दी उठ गए थे कोर्ट से।’ जज नितिन साम्‍ब्रे ने कहा, ‘मैं आपकी चिंताओं के प्रति संवेदनशील हूं, इसलिए मैं 7 बजे तक बैठता हूं। नहीं तो मैं 4.30 बजे तक बैठ सकता हूं और अपने बोर्ड में कटौती कर सकता हूं। क्‍या आप यह कहना चाहते हैं कि आपके आवेदनों को जानबूझकर समय नहीं दिया जा रहा है?

सुनवाई शुरू होने से पहले जस्‍ट‍िस नितिन साम्‍ब्रे की अदालत के बाहर भारी भीड़ इकट्ठा हो गई। जस्‍ट‍िस साम्‍ब्रे ने पुलिस को आदेश दिया कि वह भीड़ को कोर्ट से हटाए।
NCB ने किया जमानत का विरोध
इससे पहले कोर्ट में 4 बजे तक मंगलवार के लिए लिस्‍टेड 51वें मामले की सुनवाई चल रही थी। आर्यन का केस 57वें नंबर पर है। दूसरी ओर, NCB ने आर्यन खान की जमानत याचिका का विरोध करते हुए अपना जवाब सौंप दिया है। एनसीबी ने जवाब में रिया चक्रवर्ती केस का जिक्र किया है। साथ ही कहा है एनडीपीएस ऐक्‍ट की जिन धाराओं में केस दर्ज है, वह गैरजमानती हैं। एनसीबी ने अपने जवाब में यह भी लिखा है कि कुछ लोग केस के गवाहों को प्रभावित करने की कोश‍िश कर रहे हैं। NCB ने कहा है, ‘आर्यन खान के इंटरनैशनल लिंक्‍स हैं। वह जांच को प्रभावित कर सकते हैं। गवाह प्रभाकर सैल के हलफनामे को जिस तरह प्रचारित किया गया है, यह उसका उदाहरण है।’

आर्यन खान की जमानत याचिका का विरोध करते हुए एनसीबी ने अपने जवाब शाहरुख खान की मैनेजर पूजा ददलानी का भी नाम लिया है। NCB ने कहा है कि गवाह के हलफनामे में पूजा ददलानी का नाम है। साफ जाहिर है‍ कि वह जांच को भटकाने के लिए गवाहों को प्रभावित कर रही थीं। NCB ने आगे लिखा है, ‘प्रभाकर सैल के हलफनामे का आर्यन की जमानत के मामले से कोई लेना देना नहीं है। वह इंटरनैशनल लोगों से संबंध रखते हैं और इस केस की जांच को प्रभावित कर सकते हैं। हाल ही प्रभाकर सैल के हलफनामे को जिस तरह मीडिया में प्रचारित किया गया है, यह इसका उदाहरण है। कोर्ट से अपील है कि उनकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया जाए।’

मुंबई क्रूज़ ड्रग्स (Mumbai cruise drugs case ) मामले में शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) के बेटे आर्यन खान (Aryan Khan) इस वक्त मुंबई के आर्थर रोड जेल में बंद हैं। उनकी गिरफ्तारी को 24 दिन हो चुके है। आर्यन मामले में सतीश मानश‍िंंदे और अमित देसाई के बाद मुकुल रोहतगी तीसरे वकील हैं, जो उनके लिए कोर्ट में जिरह करेंगे। इससे पहले 20 अक्टूबर को आर्यन खान की जमानत याचिका को सेशंस कोर्ट ने खारिज कर दिया था। उनके वकीलों ने हाई कोर्ट में अर्जी लगाई है और मंगलवार, 26 अक्टूबर को उनकी जमानत जस्‍ट‍िस नितिन साम्‍ब्रे की अदालत में सुनवाई होनी है।

अब तक आर्यन खान और उनके फोन चैट्स से मिले सबूतों के आधार पर एनसीबी ने उनपर आरोपों की झड़ी लगाई थी, लेकिन इस वक्त खुद जांच एजेंसी निशाने पर है। उनकी जमानत के लिए सबसे बड़ा तर्क आर्यन के वकीलों का अब यह हो सकता है कि जिस एनसीबी ने आरोप लगाए हैं खुद वो अब सवालों के घेरे में है। गवाह प्रभाकर सैल के हलफ़नामे को आधार बनाते हुए वकील ये तर्क दे सकते हैं कि ना सिर्फ एनसीबी की जांच बल्कि गिरफ़्तारी भी अब सवालों में है। प्रभाकर सैल के हलफनामे को आधार बनाकर एनसीबी के जोनल डायरेक्‍टर समीर वानखेड़े पर लगे 8 करोड़ की रिश्‍वत के मामले को दलील बनाया जा सकता है। इसके अलावा केस के लिए 25 करोड़ की डील और गवाह से सादे पन्‍नों पर दस्‍तखत भी अहम तर्क हो सकते हैं। एनसीबी ऑफिस में आर्यन खान के साथ बैठे केपी गोसावी का मामला भी तर्क बन सकता है। बता दें कि पुणे में धोखाधड़ी मामले में वह खुद फरार चल रहा है, ऐसे में एनसीबी के दफ्तर में इस तरह एजेंसी का कार्रवाई में हाथ बंटाने वाली बात हैरान करने वाली है।

आर्यन खान ने हाईकोर्ट में ज़मानत याचिका के साथ एक शपथ पत्र भी दिया है। इसमें आर्यन ने कहा है, ‘मैं निर्दोष हूं। मुझे फंसाया जा रहा है।’ शपथ पत्र में आर्यन ने ये भी कहा है कि जमानत मिलने पर ना तो वो देश छोड़कर जाएंगे और ना ही केस की जांच को या सुबूतों को या गवाहों को प्रभावित करेंगे।

यहां यह भी बता दें कि ड्रग्स केस में कुछ दिनों पहले अरेस्ट हुए अरमान कोहली की जमानत याचिका पर भी मंगलवार को हाई कोर्ट में सुनवाई होनी है। इसी बीच आर्यन खान के साथ गिरफ्तार हुए अरबाज मर्चेंट के पिता असलम मर्चेंट का एक बड़ी बात कह दी है। उन्होंने कहा है कि आर्यन खान को एक उम्मीद है, क्योंकि उनके पिता शाहरुख खान हैं। इस मामले में आर्यन और अरबाज को जल्द ही जमानत मिल सकती है, लेकिन इसमें जो समय लग रहा है, इस पर उन्हें हैरानी है।’

एनसीबी के दावों को गलत बताते हुए आर्यन खान के वकील सेशंस कोर्ट में काफी दलीलें दे चुके हैं। जिसमें आर्यन खान से ड्रग्स की जब्ती नहीं, उन्हें झूठा फंसाए जाने का आरोप लगाया था। दलील में कहा गया था ति आर्यन खान के पास से कोई नशीला पदार्थ जब्त नहीं किया गया था और आरोपों को सच मानने के बिना, एनडीपीएस अधिनियम, 1985 की धारा 37 (1) लागू नहीं होता है। धारा 37 गंभीर अपराधों की बात करती है जो संज्ञेय और गैर-जमानती हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि आर्यन खान यंग ऐज के हैं और उनका किसी भी प्रकार का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया था कि आर्यन खान की समाज में मजबूत जड़ें हैं और वह अपने परिवार के साथ मुंबई का स्थायी निवासी है, उसके फरार होने या न्याय से भागने की कोई संभावना नहीं है। इसी दलील में आर्यन को एक जिम्मेदार नागरिक बताते हुए कहा था कि वह बॉलिवुड को बड़े फिल्म ऐक्टर के बेटे हैं, जिन्होंने अमेरिका के दक्षिणी कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से फिल्म में बैचलर की डिग्री ली है। साथ ही यह भी कहा गया था कि वह भारत का एक जिम्मेदार नागरिक है और आज तक अपनी प्रतिष्ठा और रिकॉर्ड रखता है।

आर्यन खान केस में पिछले दिनों एक नए ट्विस्ट ने सबको हैरान कर दिया। दरअसल एनसीबी के ही एक गवाह प्रभाकर सैल ने हलफनामा दायर कर आर्यन खान को छोड़े जाने के लिए 25 करोड़ की वसूली की बात कही है और यह भी बताया कि उसने सुना था कि इसमें से 8 करोड़ समीर वानखेड़े को जाने हैं। अब एनसीबी ने इस मामले की जांच के लिए इंटरनल कमिटी बना दी है। एनसीबी ने गवाह प्रभाकर सैल के बयान पर सोमवार सुबह सेशंस कोर्ट में अर्जी दी थी। एनसीबी ने बयान पर कार्रवाई की मांग की थी। इस पर एनसीबी की अर्जी पर सेशंस कोर्ट ने कहा कि मामला हमारे अध‍िकार क्षेत्र में नहीं है। सेशंस कोर्ट ने कहा कि जमानत का मामला हाई कोर्ट में चल रहा है। कोर्ट ने कहा कि कोई आदेश नहीं दिया जा सकता है।

सेशंस कोर्ट की ओर अपने ऑर्डर की कॉपी में आर्यन खान को जमानत नहीं देने की वजहें गिनाते हुए कहा गया था कि वह सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं। इसके साथ ही आर्यन के रेग्युलर तौर पर ड्रग्‍स लेने की बात कही गई है। अपने आदेश में कोर्ट ने यह भी माना था कि जमानत पर रिहा होने के बाद आर्यन ड्रग्‍स नहीं लेंगे यह नहीं कहा जा सकता है।

कोर्ट ने इस आदेश में यह भी कहा था कि आरोपी का कनेक्शन विदेशी नागरिक और अन्य ड्रग डीलर्स से है जिनका संबंध इंटरनैशनल ड्रग्स नेटवर्क से है, जिसे लेकर जांच अभी भी चल रही है। यदि किसी भी आरोपी को छोड़ा गया तो पूरी जांच को नुकसान पहुंच सकती है। कोर्ट ने बताया है कि पूछताछ के दौरान आरोपी नंबर 1 ने उन लोगों का नाम नहीं बताया और केवल आरोपी नंबर 1 इकलौते ऐसे शख्स हैं जो उन लोगों के बारे में जानकारी दे सकते हैं।

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