pollution

वायु प्रदुषण एक ऐसा खतरनाक प्रदुषण है जो की इन्सान की मौतों का कारण बनता है. इन दिनों गाड़ियों और कई प्रकार के उपकरणों की वजह से खतरनाक वायु प्रदुषण होता है. वायु प्रदूषण के कारण मौतें और श्वास रोग होता है. वायु प्रदूषण की पहचान ज्यादातर प्रमुख स्थायी स्रोतों से की जाती है, इसके उत्सर्जन का सबसे बड़ा स्रोत मोबाइल, ऑटोमोबाइल्स है.

भारत है नंबर वन पर

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार जिनेवा में जारी किए गए वैश्विक वायु प्रदूषण डेटाबेस के मुताबिक, भारत ने वायु प्रदुषण से दूषित होने के मामले में दुनिया में टॉप किया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक पीएम 2.5 सांद्रता के मामले में दुनिया के 15 सबसे प्रदूषित शहरों में से 14 शहर सिर्फ भारत में स्थित हैं. जिसमे पीएम 2.5 के साथ कानपुर सबसे खराब है. कोहराम न्यूज़ को मिली जानकारी के मुताबिक, 173 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर के साथ फरीदाबाद, वाराणसी और गया शहर हैं. हालाँकि इस रिपोर्ट में केवल 2016 तक के आंकड़े दिए गए हैं.

दिल्ली है छठे नंबर पर

सबसे प्रदूषित शहरों की लिस्ट में दिल्ली छठे नंबर पर है. डब्ल्यूएचओ के डेटाबेस से पता चलता है कि 2010 से 2014 के बीच में दिल्ली के प्रदूषण स्तर में मामूली बेहतरी हुई है लेकिन 2015 से फिर हालत बिगड़ने लगी है.

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दिल्ली दुनिया में सबसे प्रदूषित शहर नहीं है, यह शायद ही दिल्ली के लोगों को उत्साहित करेगा. गंभीर वायु प्रदूषण पर आवाज उठाते हुए केंद्र और दिल्ली सरकार दोनों इस मुद्दे पर समय-समय पर कुछ ऩा कुछ करते रहते हैं. रिपोर्ट से पता चलता है कि 2010 के 2014 के बीच दिल्ली के प्रदूषण के स्तर में मामूली सुधार हुआ है, लेकिन 2015 में फिर से खराब हो गया था.

2016 में, डब्ल्यूएचओ के डेटाबेस में दिल्ली छठे स्थान पर था, जिसने छः वर्षों में अपने उच्च प्रदूषण के स्तर दर्ज किए थे. शहर का पीएम 2.5 वार्षिक औसत 143 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था, जो राष्ट्रीय सुरक्षित मानक से तीन गुना अधिक था, जबकि पीएम 10 औसत 292 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था, जो राष्ट्रीय मानक से 4.5 गुना अधिक था.

पीएम 2.5 प्रदूषकों में दूषित शहर दिल्ली, पटना, आगरा, मुजफ्फरपुर, श्रीनगर, गुड़गांव, जयपुर, पटियाला और जोधपुर हैं, इसके बाद कुवैत में अली सुबा अल-सालेम और चीन और मंगोलिया के कुछ शहर हैं.

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मुंबई है चौथे नंबर पर 

भारत की वित्तीय राजधानी मुंबई दुनिया की चौथी सबसे प्रदूषित मेगासिटी है. आंकड़ों के अनुसार, 2011 में मुंबई में पीएम10 (10 पर्टिक्युलट मैटर) का स्तर 119 रहा, जो 2017 में बढ़कर 122 हो गया.

डब्ल्यूएचओ रिपोर्ट में क्या कहा गया ?

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया में 10 में से 9 लोग प्रदूषित हवा को सांस लेते हैं और हर साल आउटडोर और घरेलू वायु प्रदूषण की वजह से 7 मिलियन लोग मर जाते हैं. रिपोर्ट में कहा गया है की “वायु प्रदूषण ने 2016 में करीब 4.2 मिलियन लोगों की मौतें ली जबकि प्रदूषण ईंधन और प्रौद्योगिकी उपकरणों से खाना बनाकर हो रहे घरेलू वायु प्रदूषण से 2016 में 3.8 मिलियन मौतें हुई हैं.”

90% से अधिक वायु प्रदूषण से संबंधित मौतें कम और मध्यम आय वाले देशों में मुख्य रूप से एशिया और अफ्रीका में होती हैं, इसके बाद पूर्वी भूमध्य क्षेत्र, यूरोप और अमेरिका में निम्न और मध्यम आय वाले देशों के होते हैं.

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डब्ल्यूएचओ के प्रमुख टेड्रोस अधानोम गेबेरियस ने एक बयान में कहा की वायु प्रदूषण  हम सभी को डराता है लेकिन इसका सबसे ज्यादा शिकार गरीब लोग बनते हैं जिनके पास इलाज करवाने के लिए रूपये नहीं होते हैं.”

गैर संक्रमणीय बीमारियों के लिए है जिम्मेदार 

डब्ल्यूएचओ ने बताया कि वायु प्रदूषण मुख्य रूप से गैर-संक्रमणीय बीमारियों (एनसीडी) के लिए ज़िम्मेदार है, जिसमे हृदय रोग से लेकर स्ट्रोक से 25%, क्रोनिक अवरोधक फुफ्फुसीय बीमारी 43% और 29% फेफड़ों के कैंसर जैसी बीमारियाँ शामिल हैं.

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन ने कहा की “यह रिपोर्ट हालाँकि 108 देशों में 4,300 से अधिक शहरों और कस्बों से वायु गुणवत्ता डेटा प्रदान करती है. अफ्रीका के 47 देशों में से केवल आठ देशों ने अपने एक या अधिक शहरों के बारे में वायु गुणवत्ता की जानकारी प्रदान की और जब डेटाबेस ने 181 भारतीय शहरों पर जानकारी सूचीबद्ध की, तो उसने केवल नौ शहरों के लिए डेटा प्रदान किया.

डब्ल्यूएचओ के अनुसार वायु प्रदुषण में सल्फाट, नाइट्रेट्स और ब्लैक कार्बन जैसे प्रदूषक शामिल हैं, जो मानव स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा जोखिम पैदा करते हैं. कणों के पदार्थ से वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में घरों, उद्योग, कृषि और परिवहन क्षेत्रों, और कोयले से निकाले गए बिजली संयंत्रों द्वारा ऊर्जा का अक्षम उपयोग शामिल है. कुछ क्षेत्रों में, रेत और रेगिस्तान धूल, अपशिष्ट जलने और वनों की कटाई वायु प्रदूषण के अतिरिक्त स्रोत हैं.

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पिछले कुछ वर्षों में भारत के वायु प्रदूषण निगरानी नेटवर्क में सुधार हुआ है और अधिक शहरों की निगरानी की जा रही है, शीर्ष प्रदूषकों की सूची में भारतीय शहरों की संख्या ज़ूम हुई है.

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) के कार्यकारी निदेशक अनुमिता रॉय चौधरी ने कहा की “बेहतर वायु गुणवत्ता निगरानी के साथ, हम भारत में वायु प्रदूषण की समस्या की गहराई और प्रसार को समझना शुरू कर रहे हैं.

चौधरी ने कहा, “यह एक राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट है और राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्य योजना को स्वच्छ वायु मानकों का अनुपालन करने के लिए सभी शहरों में कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी.”

रिपोर्ट्स में कहा गया है की 2010 में, दिल्ली वैश्विक स्तर पर पेशावर और रावलपिंडी के बाद सबसे खराब प्रदूषित शहर था. दिल्ली के बाद आगरा शीर्ष 10 प्रदूषित (पीएम 2.5) शहरों में एकमात्र अन्य भारतीय शहर था, 2011 में दिल्ली और आगरा केवल दो भारतीय शहर थे और उलानबातर सबसे खराब था लेकिन 2012 में यह तब बदलना शुरू हुआ जब भारत के टॉप 20 में से 14 दुनिया के सबसे प्रदूषित थे. 2013, 2014 और 2015 में, चार से सात भारतीय शहर टॉप 20 में शामिल थे लेकिन 2016 में जारी किए गए आंकड़ों में, 15 में से 14 प्रदूषित शहर भारत में हैं.

विशेषज्ञों को यकीन नहीं हो रहा है कि 2015 और 2016 में दिल्ली के प्रदूषण के स्तर में अचानक से वृद्धि हुई है, वह परेशान हो रहे हैं की अचानक से इस प्रदुषण में वृद्धि कैसे हुई है.

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सीपीसीबी के पूर्व प्रयोगशाला प्रमुख दीपंकर साहा ने कहा की “2015 और 2016 में, फसल जलने के मौसम में उत्तर-पश्चिमी हवाएं थीं जो पड़ोसी राज्यों से कण प्रदूषण लाती थीं, हो सकता है इन मौसम संबंधी कारकों ने दिल्ली में वायु प्रदूषण को बढ़ाया हो .

चीन ने की है वायु प्रदूषण से लड़ने में तरक्की

2013 में दुनिया के 20 सबसे प्रदूषित शहर में अकेले चीन के पेइचिंग समेत 14 शहर शामिल थे लेकिन वहां प्रदूषण की समस्या पर काबू पाया गया है . जिसका बेहतर नतीजा भी सामने आया है और नतीजा यह है की 2016 में इस लिस्ट में चीन के सिर्फ चार शहर शामिल हैं. दिल्ली और पेइचिंग का वहां वायु प्रदूषण के उच्च स्तर और ऑड-इवन रोड प्रबंध या वायु प्रदूषण के इमर्जेंसी ऐक्शन प्लान को लेकर मुकाबला किया जाता है लेकिन डब्ल्यूएचओ के हालिया डेटा से पता चलता है कि पेइचिंग में 2013 के बाद लगातार प्रदूषण के स्तर में गिरावट आ रही है.


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