मुस्लिम ब्रदरहुड (MB) के खिलाफ सऊदी- अमीराती अभियान अभियान में शामिल होने और उसके खिलाफ बयान जारी करने को लेकर मिस्र स्थित विश्वविख्यात सुन्नी संस्था अल अज़हर के ग्रैंड इमाम अहमद अल-तैयब पर दबाव डाले जाने का खुलासा हुआ है।

द न्यू अरब ने अपनी रिपोर्ट में अल-अजहर की वरिष्ठ विद्वानों की परिषद में सूत्रों के हवाले से कहा कि अल-तैयब को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के व्यक्तित्वों द्वारा मुस्लिम ब्रदरहुड विरोधी बयान जारी करने के लिए संपर्क किया गया था। हालांकि, इमाम ने कहा कि अल-अजहर को इस तरह के संघर्षों के लिए मजबूर करना इसकी स्थिति को कमजोर करता है।

अखबार ने कहा कि अल-तैयब, जो मुस्लिम काउंसिल ऑफ एल्डर्स (अबू धाबी में स्थित) के अध्यक्ष हैं, ने एक राजनीतिक लड़ाई में हस्तक्षेप करके अपनी प्रतिष्ठा, या अल-अज़हर को खतरे में डालने से इनकार कर दिया।

सूत्रों ने कहा कि अल-तैयब के हस्तक्षेप से इनकार करने के बाद, यूएई के फतवा परिषद को सऊदी काउंसिल ऑफ सीनियर स्कॉलर्स (सीएसएस) द्वारा जारी किए गए फतवे का समर्थन करने के लिए मजबूर किया गया, जिसने मुस्लिम ब्रदरहुड (MB) को “आतंकवादी समूह” के रूप में वर्गीकृत किया।

सऊदी सीएसएस ने इस महीने एक बयान जारी किया जिसमें संकेत दिया गया कि मुस्लिम ब्रदरहुड (MB) “एक आतंकवादी समूह जो इस्लाम के दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व नहीं करता है।”

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