फ़िलीस्तीनी पहले क्रांति आंदोलन की अभूतपूर्व राजनीतिक उपलब्धियां सामने आई हैं, जिसमें आधिकारिक तौर पर फ़िलीस्तीनी जनता के अस्तित्व को स्वीकार किया गया है।

फ़िलीस्तीनी पहले क्रांति आंदोलन की अभूतपूर्व राजनीतिक उपलब्धियां सामने आई हैं, जिसमें आधिकारिक तौर पर फ़िलीस्तीनी जनता के अस्तित्व को स्वीकार किया गया है।

अमरीका और इस्राईल ने स्वीकार किया है कि वेस्ट बैंक और ग़ाज़ा पट्टी में रहने वाले फ़िलिस्तीन का हिस्सा हैं, वह जार्डन के नहीं हैं।

इस्राईल समझ गया है कि आक्रमण का फ़िलीस्तीनी समाज पर बुरा प्रभाव पड़ा है और सैन्य कमान ने घोषणा की है कि फ़िलिस्तीन मामले का कोई सैन्य समाधान नहीं है, जिसका तात्पर्य यह है कि इस मसले के लिए राजनीतिक रास्ता चुना जाए हालांकि प्रधानमंत्री «इस्हाक़ शामीर» राजनीतिक स्तर पर बातचीत किए जाने के विरोधी हैं।

मैड्रिड बैठख, इस्राईल और अरब दोस्ती की शुरुआत के लिए था, कि जिसमें फिलीस्तीनियों से एक स्वतंत्र सरकार के बारे में राय ली गई। इसके बाद नॉर्वे में इस्राईल और फ़िलीस्तीन के बीच फिर से गुप्त बातचीत हुई जिसका परिणाम «ओस्लो संधि» के तौर पर सामने आया। जिसके बाद इस्राईल को फिलीस्तीनी शहरों से निकलना पड़ा, 1994 में पहले ग़ाजा और अरीहा से  और फिर बाकी शहरों से इस्राईल ने पीछ हटना शुरू किया। लेकिन कुद्स और केंद्रीय अलख़लील को खाली नहीं किया गया जो समझौते का उल्लंघन है।

यासिर अराफात और इस्हाक़ राबीन के बीच लिखे गए पत्रों में अलतहरीर संगठन द्वारा इस्राईल को आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया गया, और यह अनुबंध किया गया कि वह इस्राईल के विरोध नहीं करेंगे। और बदले में इस्राईल ने भी युद्ध समाप्त करने के लिए शांतिपूर्ण रास्ता खोजने और अलतहरीर संगठन को फ़िलीस्तीनी जनता के प्रतिनिधि के तौर पर स्वीकार करने का वादा किया।

इस समझौते के अनुसार इस्राईली अवैध कब्जे के बजाय एक राष्ट्री सरकार बनेगी। दिसंबर 1995 में «ओस्लो 2» नामक एक नए समझौते पर हस्ताक्षर हुए  जो एक संविधान सभा के माध्यम से «फिलीस्तीनी राष्ट्रीय प्राधिकरण» की हुकूमत की स्थापना हुई, और 20 जून 2004 में «वेस्ट बैंक» के साथ 5 अन्य क्षेत्र भी फ़िलीस्तीन को सौंप दिए गए जिसमें शिक्षा, प्रशिक्षण, आर्थिक सुविधाएं, टैक्स वसूली और पर्यटन की ज़िम्मेदारी फ़िलिस्तीनियों की हो गई।


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