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नई दिल्ली। संयुक्त अरब अमीरात समेत खाड़ी में काम करने वाले एशियाई मजदूरों की स्थिति बेहद ख़राब है और वह श्रम नियमों के विरुद्ध काम करने के लिए मजबूर हैं। मज़दूरों की स्थिति को ठीक करने का पहला प्रयास स्वयं पीड़ित और उनके परिवार को करना चाहिए। इसके लिए ज़रूरी है कि हम अपनी जानकारी में वृद्धि करें। यह बात नई दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में यूनिवर्स नॉलेज फाउंडेशन और पीस एंड जस्टिस की तरफ से यूएई में एशियन मजदूरों के हालात और मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर एक सेमिनार में सामने आई। कार्यक्रम में कई बुद्धिजिवियों ने अपने विचार व्यक्त किए। साथ ही वहां पर हो मानवाधिकार के उल्लंघन को लोगों को बताया।

सेमीनार में श्रम कानूनों के जानकार किशोर गोगर ने कहा कि खाड़ी में मजदूरों को पैसे लेकर काम देने से ही हम स्थिति का आंकलन लगा सकते हैं। उन्होंने कफाला का हवाला देते हुए कहाकि भारतीय मजदूरों के पासपोर्ट जब्त कर लिए जाते हैं। उन्हें देश में बंधक बनाकर काम करने के लिए मजबूर किया जाता है और यह किसी भी तरह से गुलाम प्रथा से अलग नहीं है। गोगर ने पासपोर्ट बंदी के साथ कार्य करने को मजबूर किए जाने को नवीन गुलाम प्रथा करार दिया। उन्होंने कार्य घंटे और श्रम स्थितियों पर भी क्षोभ का इजहार किया।

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सेमीनार में श्रम कानूनों के जानकार शशि झा ने अनुभव का हवाला देते हुए कहाकि भारतीय औऱ एशियाई मजदूरों के साथ नौकरी देते वक्त वादा तो कुछ और किया जाता है लेकिन वहां उनसे काम कुछ औऱ करवाया जाता है। उन्होंने कहा कि कानून बनाकर मजदूरों के मानवाधिकारों की रक्षा करनी चाहिए, जिससे उन्हें वहां पर काम करने में आसानी हो सके।

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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व अध्यक्ष फैजुल हसन ने कहा कि भारत को देश में ऐसा माहौल बनाना चाहिए, जिससे कि भारतीयों को नौकरी के लिए बाहर जाना ही नहीं पड़े। उन्होंने कहा कि कानून तो बहुत सारे बनाए गए हैं, लेकिन उनका सही प्रयोग नहीं किया जाता है। फैजुल ने कहा कि भारत सरकार को गल्फ देशों में काम करने वाले मजदूरों के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए वहां की सरकार पर दबाव डालना चाहिए।

सेमीनार में रोज़गार मामलात के जानकार सोहैल अहमद ने कहाकि मजदूरों के साथ मानवाधिकारों का उल्लंघन बहुत आम बात हो गई है। कंपनी और कंसलटेंसी एजेंसियों को चाहिए कि रोजगार का वादा करते समय उन्हें भी श्रम कानून और अन्तरराष्ट्रीय संधियों के बारे में जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों को खुद भी मानवाधिकार कानून के प्रति जागरूक होना चाहिए।

एसएमसी के ग्लोबल एचआर सुमन सिंह ने कहा कि सभी को मानवाधिकारों की जानकारी रखनी चाहिए, जिससे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहे। उन्होंने अपने अनुभवों को साझा करते हुए लोगों को जागरूक रहने और अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने के लिए भी चेताया। साथ ही उन्होंने लोगों से खुद को शिक्षित करने की भी अपील की।

कार्यक्रम के अंत में पीस एंड जस्टिस फोरम के प्रतिनिधि इमरान ने सभी मेहमानों का शुक्रिया अदा किया। कार्यक्रम में रोजगार और श्रम मामलात के जानकार, नियुक्ताओं, विधि छात्रों, पत्रकारों और शोधार्थियों ने भाग लिया।

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