बाबरी मस्जिद केस में बड़ा मौड़ – सुन्नी वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़े ने……

12:22 pm Published by:-Hindi News

अयोध्या में बाबरी मस्जिद की जमीन के मालिकाना हक को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। इसी बीच विवाद की दो मुख्य पार्टियां सुन्नी वक्फ बोर्ड और निर्वाणी अखाड़े ने अदालत द्वारा गठित मध्यस्थता समिति को एक पत्र लिखा है। दोनों पक्ष एक बार फिर से कोर्ट के बाहर बातचीत के जरिए इस विवाद को सुलझाना चाहते हैं।

बता दें कि अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट ने पहले मध्यस्थता से हल निकालने के लिए पैनल बनाया था। 155 दिनों तक कोशिशें भी हुईं, लेकिन कोई हल नहीं निकला। यह सामने आया था कि हिंदू और मुस्लिम पार्टियां इस विवाद का समाधान निकालने में सफल नहीं रहीं। सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता के लिए जो पैनल बनाया था उसमें तीन लोग शामिल थे। इसमें सुप्रीम कोर्ट के जज एफएम कलीफुल्ला, सीनियर वकील श्रीराम पंचू और श्री श्री रविशंकर का नाम था।

सुन्नी वक्फ बोर्ड और निर्वाणी अखाड़े ने न्यायालय के मध्यस्थता पैनल में विश्वास जताया है और समझौते पर बातचीत करने की मांग की है। उलेमा ए हिंद और राम जन्मभूमि न्यास की वजह से बात बिगड़ने से पहले तक दोनों पक्ष लगभग अंतिम निर्णय पर आ गए थे लेकिन दो पक्षकारों के हार्ड स्टैंड के कारण यह कोशिश रुक गई थी। मध्यस्थता पैनल की प्रक्रिया आठ मार्च से शुरू हुई थी और 155 दिनों तक चली थी। अब रामआनंदी अखाड़े और निर्मोही अखाड़े ने मध्यस्थता की वकालत की है।

जमात उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना सुहैब कासमी ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि 2016 में अयोध्या वार्ता कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी एक बार फिर भूमि विवाद को सुलझाने के लिए दोनों पक्षों के प्रभावशाली लोगों को शामिल कर बातचीत करेगी। मध्यस्थता प्रक्रिया संभवत: अक्टूबर से शुरू होगी।

वक्फ बोर्ड की तरह निर्वाणी अखाड़े ने भी बातचीत की इच्छा जाहिर करते हुए पत्र लिखा है। गौरतलब है कि निर्वाणी अखाड़ा उन तीन प्रमुख रामआनंदी अखाड़ों में से है जो हनुमान गढ़ी मंदिर की देखरेख करता रहा है। निर्वाणी अखाड़े की बात से निर्मोही अखाड़ा भी सहमत है।

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