मुंबई: तहफ़्फ़ुज़ के नामुस ए रिसालत बोर्ड की शनिवार को इस्लाम जिमखाना में हुई बैठक के दौरान उपस्थित अधिवक्ताओ को संबोधित करते हुए एडवोकेट आशीष शेलार ने कहा कि देश में चल रहे इस घृणा के माहौल को प्यार मुहब्बत से बदले जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से नफरत फैलाई जा रही है। उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई लाजमी है। साथ ही मानवाधिकार का संरक्षण भी आवश्यक हो गया है।

बोर्ड की लीगल टीम के प्रमुख एडवोकेट यूसुफ मच्छला ने कहा कि संविधान निर्माता डॉ भीमराव आंबेडकर ने कहा था कि मैं न्याय के लिए लड़ूंगा। हम लोगो की भी न्याय के लिए आवाज बुलंद करनी चाहिए। आज हम सामाजिक सद्भाव को बचाने के लिए एकजुट हुए है। हमे नफरत फैलाने वालों और मानवाधिकारों का अतिक्रमण करने वालो से निपटना होगा।

हजरत मोइन मियां ने कहा कि हर धर्म के महापुरूषों के सम्मान किया जाना चाहिए। अगर कोई किसी धर्म या उनके पेशवाओं के खिलाफ अर्नगल टिप्पणी करता है तो उन पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने शरजील इमाम पर भी सख्त कार्रवाई की मांग की। जिसने हिन्दू धर्म के लोगों की भावनाओं को आहत किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में सड़कों पर उतरकर बवाल करने के बजाय कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि बोर्ड का गठन उपरोक्त लक्ष्य को ही ध्यान में रखकर किया गया है। जिससे देश में साम्प्रदायिक सौहार्द बना रहे।

वहीं रज़ा एकेडमी के प्रमुख अल्हाज सईद नूरी ने कहा कि धार्मिक महापुरुषों का अनादर कर देश का अमन ओ सुकून बर्बाद किया जा रहा है। विशेषकर मुस्लिमों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

एडवोकेट रिज़वान मर्चेंट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने निर्देशों में घृणास्पद बयानों और टिप्पणियों पर रोक लगाने की बात कही है। साथ ही कुरान में भी साफ कहा गया कि ‘तुम अपने धर्म की पैरवी करो और वो अपने धर्म को माने। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में सड़कों पर उतरना और माहौल खराब करना सही नही है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों से निपटने के लिए कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। फ़ास्ट ट्रेक कोर्ट में मुकदमा चलाकर दोषियों को कड़ी सजा दिलाई जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि बोर्ड की लीगल टीम ऐसे मामलों की मुफ्त में पैरवी करेंगी।

एडवोकेट अरशद बागवान ने कहा कि भड़काऊ बयान और टिप्पणियां करने वालो के खिलाफ रासुका के तहत FIR दर्ज कराई जाए। उन्होंने कहा कि रासुका में मामला दर्ज होने पर आरोपी को जमानत नही मिल पायेगी। इससे मुलजिम ख़ौफ़ज़दा होगा और लोगों को भी नसीहत मिलेगी।

एडवोकेट जैद सिद्दीकी ने मानवाधिकारों के उल्लंघन पर कहा कि अगर किसी मुकदमे में कोई फर्जी तौर पर फंसाया जाता है तो उसकी भी पूरी कानूनी मदद की जाएगी। उन्होंने कहा कि आज मुसलमानो पर पुलिस का जुल्म बढ़ है। फर्जी मुदक में दर्ज कर मुस्लिमों को टॉर्चर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में हर पीड़ित को भी सहायता दी जायेगी।

अमीन पटेल ने कहा कि धार्मिक भावनाओं को आहत करने के मामले में, हम यहां धार्मिक सुरक्षा के लिए एकत्र हुए हैं। इस्लाम पड़ोसी को दया करना और भूखे को खाना खिलाना सिखाता है। हमें ऐसे मामलों में कानून को अपने हाथों में लेने से बचना चाहिए। कानूनी कार्रवाई दोषियों के खिलाफ की जाए। भाजपा विधायक आशीष शेलार ने कहा कि किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत करना घृणास्पद है और फिर युवा सड़कों पर उतरते हैं और राष्ट्र और खुद को नुकसान पहुंचाते हैं, फिर भी उन्हें न्याय नहीं मिलता है। यह बैठक शांति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। हमारा लक्ष्य शांति है। ऐसे मामलों सजा होनी ही चाहिए। अगर कोई सजा नहीं होती है, तो ऐसे लोगों का मनोबल ऊंचा होता है।”

इस बैठक के बाद कानून मंत्री को एक पत्र भेजा गया। जिसमे इसे गंभीरता से लेने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।  एडवोकेट मोबिन सुल्कर ने कहा कि उकसावे और घृणा फैलाने के मामले में दंडित करने और पुलिस प्रणाली में संशोधन करने की भी जरूरत है।

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