लगभग दो साल से यमन में युद्ध कर रहा सऊदी अरब आर्थिक रूप से कंगाली हो चुका है इसीलिए अपनी अर्थ व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए यह देश पचाल लाख विदेशियों को निकाल रहा है

सऊदी अरब द्वारा यमन पर लगभग पिछले दो साल जारी युद्ध के बाद इस देश की संकटमयी अर्थव्यवस्था की रिपोर्टों के बाद अब सऊदी मीडिया में ख़बरे आ रही हैं कि यह देश सऊदी अरब में रह रहे पचास लाख विदेशियों के बाहर निकालेगा।

लंदन से छपने वाले सऊदी समाचार पत्र अलहयात ने अपने सोमवाल के संस्करण में इस ख़बर को प्रकाशित करते हुए रिपोर्ट दी है कि सऊदी अरब की शूरा काउंसिल अपनी अगली बैठक में दुनिया के सबसे विवादास्पद तंत्र मामलों में से एक की समीक्षा करेगी, क्योंकि “ग़ैर क़ानूनी रूप से रहने वाले विदेशियों” से मुक़ाबले के विषय और गृह मंत्रालय में ग़ैर क़ानूनी रूप से सऊदी अरब में रह रहे पचास लाख विदेशियों को देश से निकाले जाने के लिए कमेटी के गठन की समीक्षा की जाएगी।

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इस सुझाव के देने वाले सदक़ा फ़ाज़िल ने कहाः इन विदेशियों में एक बड़ी संख्या वह हैं जो विभिन्न बहानों से सऊदी अरब में दाख़िल हुए हैं और उनका मक़सद रिश्तेदारों से मुलाक़ात या धार्मिक यात्रा नहीं है बल्कि यह लोग इस देश में लगतार रहने के लिए आए हैं और उनका यह कार्य ग़ैर क़ानूनी है क्योंकि यह हमारे क़ानून और अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के विरुद्ध है।

उन्होंने कहाः इन विदेशियों का देश में बाक़ी रहना –चाहे किसी सूरत में क्यों न हो- देश की राजनीति, अर्थ व्यवस्था, समाज और सुरक्षा की दृष्टि से ख़तरनाक है और यह बात किसी से ढकी छिपी नहीं है

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