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मोरना | उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में तीन साल पहले हुए दंगो ने पुरे भारत को हिला दिया. इन दंगो में कई सौ लोग मारे गए और हजारो लोग बेघर हो गए. उन दंगो की आग अभी ठंडी होनी शुरू ही हुई थी की एक बार फिर मुजफ्फरनगर उसी आग में जलते हुए बचा है. नोट बंदी की वजह से मुजफ्फरनगर के मोरना में जाटो और दलितों के बीच हुए संघर्ष ने एक बार फिर उन दंगो की याद ताजा कर दी.
शनिवार को भोखारेहडी बस अड्डे पर लगे एटीएम में पैसे निकालने के लिए लम्बी लाइन लगी हुई थी. लाइन में दलित समाज से सुशील खड़ा हुआ था और उसके पीछे तीन चार जाट युवक खड़े हुए थे. तभी किसी बात पर सुशील और जाट युवको में कहासुनी शुरू हो गयी. थोड़ी ही देर में दोनों पक्षों के बीच हाथापाई शुरू हो गयी. इस दौरान वहां काफी दलित समाज के लोग इकठ्ठा हो गए.

इस दौरान दलितों ने जाट समाज के रामबीर की काफी पिटाई कर दी. यह देख जाटो ने अपने लोगो को फ़ोन कर घटना स्थल पर बुला लिया. इसके बाद दोनों पक्षों के बीच खूब लाठिया चली. इतना ही नही दोनों पक्षों के बीच खूब गोलीबारी भी हुई जिसमे छह लोग घायल हो गए. सूचना मिलने पर पुलिस मौका-ए-वारदात पर पहुंची.

पुलिस ने दोनों पक्षों को समझा बुझा कर शांत करने की कोशिश की. इस दौरान दलित समाज ने पुलिस के सामने प्रदर्शन किया और हमलावरों की गिरफ़्तारी की मांग की. यही नही दलितों ने पुलिस के साथ नोक झोंक भी की. हालंकि पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ गोलीबारी करने का मामला दर्ज कर लिया है. इलाके में काफी पुलिस बल और पीएसी की तैनाती कर दी गयी है. जबकि हालात अभी भी सामान्य नही हुए है. इलाते में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है.


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