लोकसभा में नागरिकता (संशोधन) विधेयक पारित होने के कुछ ही देर बाद भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता मेहदी आलम बोरा ने इसके विरोध में मंगलवार को पार्टी के सभी पदों से त्याग पत्र दे दिया।
उन्होंने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास को अपना त्यागपत्र सौंपा है।

बोरा ने अपने त्यागपत्र में लिखा है, ‘‘मैं नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध करता हूं । मैं सही अर्थों में महसूस करता हूं कि इससे असमी समाज को हानि होगी ।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह विधेयक असमी समाज के धर्मनिरपेक्ष ढांचे को प्रभावित करेगा। इसलिए मैं लगातार इसका विरोध करता आ रहा हूं ।’’

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बोरा ने कहा, ‘‘लोकसभा में इस विधेयक के पारित होने के बाद मैं भाजपा से सहमत नहीं हो सका और इसलिए मैं पार्टी की प्राथमिक सदस्यता सहित सभी पदों से इस्तीफा दे रहा हूं।’’ बता दें कि
सोनेवाल सरकार में अतुल बोरा के साथ असम गण परिषद के 3 मंत्री शामिल हैं। संसद में उसका कोई सदस्य नहीं है। भाजपा से उसका गठबंधन 2014 के चुनाव से पहले हुआ था।

एक टीवी चैनल से बोरा का कहना था कि तभी साफ कर दिया गया था कि इस बिल पर वह भाजपा का साथ नहीं देंगे। उन्हें पहले बताया गया था कि नरेंद्र मोदी अवैध प्रवासियों के मुद्दे को सुलझाना चाहते हैं। बोरा ने कहा कि अब लगता है कि हमारे साथ धोखा हुआ।

उल्लेखनीय है कि मुस्लिमों के साथ भेदभाव करते हुए मोदी सरकार ने सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल 2016 से 1955 के कानून को संशोधित करने हेतु लोकसभा में प्रस्ताव पारित किया है। इससे अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के गैर मुस्लिमों (हिंदु, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी व इसाई) समुदाय के लोगों को नागरिकता देने का रास्ता तैयार होगा।

अभी के कानून के अनुसार वैध दस्तावेज होने पर ऐसे लोगों को 12 साल बाद भारत की नागरिकता मिल सकती है, लेकिन बिल पास हो जाने के बाद यह समयावधि 6 साल हो जाएगी।

असम गण परिषद के नेता व पूर्व मुख्यमंत्री प्रफुल्ल कुमार महंतो ने सोमवार दोपहर में बयान जारी कर कहा था कि बिल लोकसभा में पास हुआ तो समर्थन वापस ले लिया जाएगा। संयुक्त संसदीय दल ने इस मामले में असम का दौरा किया था तब भी पार्टी ने साफ कर दिया था कि वह इसके विरोध में है।

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