बीजेपी सरकारों द्वारा मुस्लिम नामों वाली जगहों के नाम बदले जाने को लेकर आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से सवाल किया कि अपना नाम कब बदल कर रहे हैं।क्योंकि उनके नाम में जो ‘शाह’ आता है वो तो फारसी शब्द है।

ओवैसी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘उत्तर प्रदेश में नाम बदले जा रहे हैं। इलाहाबाद का नाम प्रयागराज रख दिया गया। अब आगरा का नाम बदलने वाले हैं। अयोध्या का नाम बदला दिया। हर जगह का नाम बदला जा रहा है। शाह भी अपना नाम बदलें। अमित शाह के नाम में जो शाह है, वो फारसी का शब्द है। अब क्या वह इस नाम को बदलेंगे या रखेंगे?’

इससे पहले रविवार को इतिहासकार इरफान हबीब ने कहा है कि बीजेपी को पहले अपने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह का नाम बदलने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा था, ‘उनका सरनेम शाह ईरानी मूल का है, ना कि गुजराती।’ एएमयू के 87 वर्षीय प्रफेसर एमेरिटस इरफान ने कहा था, ‘यहां तक कि गुजरात भी ईरानी मूल का नाम है। पहले इसे गुजरातरा बोला जाता था। इस राज्य का नाम भी बदला जाना चाहिए।’

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इरफान हबीब ने कहा, ‘बीजेपी सरकार द्वारा शहरों का नाम बदलना आरएसएस की हिंदुत्व पॉलिसी का हिस्सा है। पाकिस्तान में जो भी चीज इस्लामिक नहीं थी उसे खत्म कर दिया गया, उसी तरह आरएसएस और हिंदूवादी संगठन देश में उस हर चीज का नाम बदलना चाहते हैं जो नॉन-हिंदू या खासतौर पर इस्लामिक मूल की है।’

इतिहासकार हबीब ने भाजपा विधायक संगीत सोम द्वारा मुजफ्फरनगर का नाम बदलने की मांग की भी तीखी आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि यह स्पष्ट रूप से सांप्रदायिक है। एक ट्वीट में हबीब लिखते हैं, ‘अब मुजफ्फरनगर का नाम लक्ष्मीनगर करने की मांग स्पष्ट रूप से सांप्रदायिक है। 1633 में सैय्यद मुजफ्फर खान द्वारा स्थपाना के बाद से किसी ने इसका नाम नहीं बदला है। मुजफ्फर शाहजहां के समय में बेहद सम्मानित व्यक्ति थे। अब दंगों के आरोपी संगीत सोम द्वाया यह मांग की जा रही है।’

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