सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने शुक्रवार को सबरीमाला विवाद मामले की तुलना बाबरी मस्जिद हुए कहा कि आरएसएस और बीजेपी की और से जैसा बाबरी विध्वंस के समय किया गया था, ठीक वैसा ही माहौल और तरीका यहां अपनाया जा रहा है।

उन्होने कहा, आरएसएस और बीजेपी ने पहले सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया था और अब सुनियोजित तरीके से इसका विरोध करना शुरू कर दिया है। आरएसएस चाहती थी कि महिलाओं को मंदिर में प्रवेश न मिले लेकिन, वह ये लड़ाई हार गए। आरएसएस ने मंदिर समय पर न खुलने देने का प्रयास किया और वे इसमें भी विफल रहे।

येचुरी ने कहा कि केरल सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के क्रियान्वयन के लिए कोशिश कर रही है। कुछ ऐसे समूह हैं जो केरल को अशांत करने की कोशिश कर रहे हैं।लेकिन सरकार उन लोगों के साथ कड़ाई से निपटेगी जो आस्था के नाम पर या किसी के बहकावे में आकर माहौल को खराब कर रहे हैं।

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उन्होंने कहा कि तीन तलाक मामले में तो केंद्र सरकार अध्यादेश लेकर आई लेकिन सबरीमाला मामले में सरकार ऐसा नहीं कर रही है। अध्यादेश लाते वक्त सरकार की दलील थी कि संविधान की नज़र में महिला और पुरुष बराबर हैं और तीन तलाक महिलाओं और पुरुषों के साथ बराबरी का व्यवहार नहीं करता है।

सीपीएम नेता ने कहा कि माथे पर भगवा रंग की पट्टी पहने हुए लोगों ने महिला पत्रकारों के साथ बुरा बर्ताव किया। ये बिल्कुल वैसी ही स्थिति है जैसी बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के समय दिखती थी।

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