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पांच राज्यों में जनता ने सिंहासन पर किसे बैठाया है इसकी तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है। रुझानों में कांग्रेस भाजपा को उसके गढ़ में हराता हुआ दिखाई दे रही है। छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में पिछले 15 सालों से शासन कर रही भाजपा को कांग्रेस हराने में कामयाब हुई। वहीं राजस्थान में भी वसुंधरा राजे की अपना सिंहासन खाली करना होगा।

भाजपा की इस हार के वैसे तो बहुत कारण हैं। मगर प्रमुख कारणों में से एक है अल्पसंख्यकों का खुलकर कांग्रेस का समर्थन करना। अल्पसंख्यक आबादी किसी पार्टी को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। हालांकि मुस्लिमों को कोई खास प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया है।

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मध्यप्रदेश

राज्य में करीब 11 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं। यहां मालवा, निमाड़ और भोपाल क्षेत्र की करीब 40 सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव रहा है। सबसे ज्यादा लगभग 50 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता भोपाल उत्तर सीट में हैं। यहां लगातार 4 बार से कांग्रेस जीतती रही है। इस बार कांग्रेस के आरिफ़ अकिल ने जीत दर्ज की है। इसके अलावा भोपाल मध्य से आरिफ़ मसूद कामयाब हुए है।

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छत्तीसगढ़

यहां 2 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता है जिनका 4 सीटों पर प्रभाव है। यहां पर भाजपा ने एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया जबकि विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने 2 मुस्लिमों को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने भाजपा महासचिव सरोज पांडेय के गृहक्षेत्र बैशाली नगर से बदरुद्दीन और मुख्यमंत्री रमन सिंह के गृहक्षेत्र कवर्धा से अकबर को टिकट दिया। अकबर ने जीत हासिल की है लेकिन बदरुद्दीन कामयाब नहीं हो सके।

मिजोरम 

उत्तर पूर्व के इस राज्य में लगभग 2 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं। यहां से दोनों प्रमुख पार्टियों ने एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया है। यहां की केवल एक सीट पर मुस्लिम प्रभाव है।

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