जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने मदरसों के आधुनिकीकरण की सरकारी पेशकश ठुकराते हुवे उन्होंने कहा कि “मुझे उनकी मदद नहीं चाहिए.” उन्होंने ये बात मोदी सरकार के दो साल पूरे होने पर मुस्लिम समुदाय के लिए उठाए क़दम पर प्रतिक्रिया देते हुए कही हैं. साथ ही मौलाना मदनी ने मुसलमानों के पिछड़ेपन के लिए कांग्रेस के लंबे शासन को ज़िम्मेदार ठहराया हैं.

उन्होंने कहा कि ‘मोदी साहेब’ अगर मुसलमानों के हमदर्द हैं तो कुछ अहम क़दम उठाएं. उन्होंने आगे कहा कि “मैं मानता हूँ कि वो हमदर्द हैं. तो वो मेरे लिए स्कूल बना दें. हमारे इलाके के लिए कॉलेज बना दें. मेरे यहाँ स्किल के विकास के काम करवा दें. प्लीज़ मेरे मदरसे को ना छेड़ें.” उन्होंने आगे कहा, “मेरी क़ौम ने भूखे रहकर मदरसों को बनाया है और चला रही है और मैं इसी तरह चलाऊंगा. मदरसों को उनके किसी सपोर्ट की ज़रुरत नहीं है. इसमें हाथ नहीं लगाने दूंगा.”

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गोरतलब रहे कि मोदी सरकार ने साल 2014-15 के बजट में मदरसों में कंप्यूटरीकरण और आधुनिकीकरण के लिए 100 करोड़ रुपए की राशि का एलान किया था. इस योजना को पूरा करने के लिए मानव संसाधन मंत्रालय और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय को ज़िम्मेदारी सौंपी गयी है.

मौलाना मदनी ने सरकार के विरोध का कारण बताते हुवे कहा कि “हम ख़ुद कंप्यूटर वग़ैरह लगा रहे हैं. हम जो कर सकते हैं वो कर रहे हैं. लेकिन सरकार की मदद की ज़रूरत नहीं क्योकि सरकार जिस काम को हाथ में लेती है तौबा, तौबा वो बर्बाद ही जो जाती है.”