पणजी | बुधवार को मोदी सरकार की कैबिनेट बैठक में देश से लाल बत्ती कल्चर खत्म करने का फैसला लिया गया. अब देश में केवल 5 लोग लाल बत्ती का इस्तेमाल कर सकेंगे. हालाँकि यह आदेश 1 मई से लागु होगा लेकिन कुछ मंत्रियो ने कल से ही लाल बत्ती हटानी शुरू कर दी है. आदेश के तुरंत बाद सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने अपनी गाड़ी से लाल बत्ती हटवा दी.

हालाँकि पक्ष और विपक्ष दोनों ही तरफ से फैसले की सराहना की गयी है लेकिन सवाल यह उठता है की क्या केवल लाल बत्ती हटा देने से देश से वीआईपी कल्चर खत्म हो जायेगा? मंत्री, नेता, अधिकारी को मिलने वाली सुरक्षा, उनके दिए जाने वाली दूसरी सुख सुविधा, पीछे चलने वाला कारो का काफिला, जब तक यह सब खत्म नही होगा तब तक देश से वीआईपी कल्चर खत्म होने पर हमेशा सन्देह ही बना रहेगा.

गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर परिकर ने भी इसी और इशारा करते हुए कहा की कुछ सीमित लोगो को छोड़कर बाकी लोगो की सुरक्षा को विस्तार नही देना चाहिए. उन्होंने कहा की वीआईपी संस्कृति गलत चीज है, इसको कम करना होगा. वीआईपी को मिलने वाली सुरक्षा भी इसी का एक हिस्सा है. इसलिए मैं मानता हूँ की देश के केंद्र बिंदु राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री है, इनके अलावा बाकी लोगो पर अनावश्यक सुरक्षा पर समय बर्बाद नही करना चाहिए.

मनोहर परिकर से जब मोदी सरकार के फैसले पर पुछा गया की वो लाल बत्ती हटाने के लिए तैयार है तो उन्होंने कहा की मुझे अभी इस फैसले की जानकारी नही है. अगर हमारे पास आदेश आता है तो जरुर इसका क्रियान्वयन होगा. हालाँकि ज्यादातर विपक्षी दलों ने सरकार के फैसले की सराहना की है लेकिन माकपा नेता वृंदा करात ने इसका विरोध करते हुए कहा की पहले सरकार को अपने दिमाग की लाल बत्ती हटानी चाहिए.

वृंदा करात ने कहा की गाडियों से लाल बत्ती तो मिनटों में हट जाती है लेकिन असल समस्या दिमाग की लाल बत्ती हटाने में आती है. इससे ज्यादा बड़ा मुद्दा लाल बत्ती कल्चर को हटाने का है. बीजेपी नेता जनता से सीधे मुंह बात करना पसंद नही करते. उन्हें उन किसानो की चिंता नही है जो आत्महत्या कर रहे है, उन लोगो की चिंता नही है जो गौरक्षको की गुंडागर्दी की वजह से अपनी जान गँवा रहे है. इन मुद्दे पर बात करने की सरकार के पास फुर्सत नही है.

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