अबू अशरफ जीशान

रमजान का मुकददस महीना इस साल आगामी April 25 से शुरू हो रहा है I निश्चित तौर पर दुनिया के समस्त मुसलमान समाज के लिए यह एक सबसे पवित्र समय होता है I वैसे तो विश्व के समस्त मुसलमान रमजान के महीने को बडे परंपरागत तरीके से मानते हैं पर इस वर्ष, जब संपूर्ण विश्व कोरोना महामारी संकट से झूझ रहा है, मुस्लिम समाज के लिए रमजान एक ‘एसिड टेस्ट’ साबित होगा I

यह वैश्विक संकट किसी धर्मं विशेष तक सीमित नहीं है, वरन समस्त मानव जाति के लिए एक घोर संकट का काल है I पहली बार ऐसा हुआ है कि सऊदी सरकार ने कोरोना संकट के मद्देनज़र मक्का और मदीना की दोनों पवित्र मस्जिदों को जायरीनो के लिए बंद कर दिया है I विश्व के तमाम अन्य देशों ने भी अपने यहाँ की मस्जिदों को नमाजियों के लिए बंद कर दिया है I इन देशों ने सामूहिक नमाज को तो बंद कर ही दिया है, इसके अलावा मुसलमानों को रमजान के दौरान घर पर ही रहकर इबादत करने व नमाज़ पढने की सलाह दी है; जिससे नमाजियों की ही सुरक्षा होगी I

इस संकट की घडी में इस बात की आवश्यकता है कि समाज के धर्म गुरु व मौलाना, जनता से अपील करें को वो कोविद-19 सुरक्षा से सम्बंधित सुरक्षा मानकों एवं निर्देशों का पालन करें एवं सामाजिक दूरियां बनाये रखें I रमजान के दौरान नमाज़ व तरावीह घर में ही पढ़ें व शाम को रोज़ा इफ्तार भी घर में ही करेंI निश्चित रूप से कोरोना संकट से निपटनें के लिए हमें एकजुट होकर कोविड-19 सम्बंधित दिशा निर्देश अपनाना ही हमारें सुरक्षित रहने का एकमात्र विकल्प है जो पवित्र रमजान -२०२० में सच्ची इबादत होगी I

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