बर्लिन: लीबिया को लेकर विश्व नेता रविवार (19 जनवरी) को बर्लिन में एकत्र हुए। जिसमे रूस, तुर्की और फ्रांस के राष्ट्रपतियों समेत विश्व नेताओं ने युद्ध में किसी भी रूप में दखल को रोकने की योजना पर हस्ताक्षर किए, चाहे वह दखल हथियारों के रूप में हो, सैनिकों के रूप में या फिर वित्तपोषण के तौर पर हो।

सम्मेलन की मेजबान जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने कहा, ‘‘लीबिया में बिलकुल अलग किस्म के हालात हैं, जिनमें तुरंत यह सुनिश्चित करना कि संघर्षविराम का सम्मान हो, यह आसान नहीं है। लेकिन हमें उम्मीद है कि आज के सम्मेलन से हमारे पास यह मौका है कि युद्धविराम आगे कायम होगा।’’

वहीं तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन ने कहा कि यह लीबिया में “युद्ध विराम और राजनीतिक समाधान कायम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।” संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत घासन सलेम ने बताया, “लीबिया में सभी तरह के विदेशी हस्तक्षेप को रोकने की जरूरत है।” एर्दोआन ने वार्ता से पहले कहा था कि लीबिया में शांति कायम करनी है तो हफ्तार को अपना शत्रुतापूर्ण रवैया छोड़ना होगा।

संयुक्त राष्ट्र को भी उम्मीद है कि सभी पक्ष हस्तक्षेप को रोकने की एक योजना पर दस्तखत करेंगे, और युद्धविराम को लेकर प्रतिबद्धता जताएंगे, जो सभी तरह की शत्रुता को खत्म कर देगा।

हालांकि सम्मेलन युद्धरत पक्षों के बीच गंभीर वार्ता तक नहीं पहुंची। इस दौरान दोनों पक्षों ने स्थायी युद्धविराम समझौते पर भी हस्ताक्षर नहीं किए। यह संघर्ष शक्तिशाली नेता खलीफा हफ्तार और संयुक्त राष्ट्र की ओर से मान्यता प्राप्त सरकार के प्रमुख फयेज अल सराज के बीच चल रहा है।

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