नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस दीपक गुप्ता बुधवार को रिटायर हो गए। उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिग के जरिए फेयरवेल दिया गया। इस मौके पर कहा कि देश का लीगल सिस्टम अमीरों और ताकतवरों के पक्ष में हो गया है। जज ऑस्ट्रिच की तरह अपना सिर नहीं छिपा सकते, उन्हें ज्यूडिशियरी की दिक्कतें समझकर इनसे निपटना चाहिए।

गुप्ता ने कहा कि ”सिस्टम का काम करना अमीरों और शक्तिशाली लोगों के पक्ष में अधिक लगता है। यदि एक अमीर व्यक्ति सलाखों के पीछे है, तो सिस्टम तेजी से काम करता है। जब कोई किसी गरीब की आवाज उठाता है तो सुप्रीम कोर्ट को उसे सुनना चाहिए और जो भी गरीबों के लिए किया जा सकता है वो करना चाहिए। किसी भी परिस्थिति में संस्थान की अखंडता ( ईमानदारी)  को दांव पर नहीं लगाया जा सकता है। न्यायपालिका को हर अवसर पर उठना चाहिए। मुझे यकीन है कि मेरे भाई जजों के चलते यह सुनिश्चित किया जाएगा कि लोगों को अदालत से जो चाहिए वह मिल जाए।”

उन्होंने कहा कि संविधान जजों की पवित्र पुस्तक है। जब एक जज अदालत में बैठता है, तो हमें अपनी धार्मिक मान्यताओं को भूलना होगा और केवल इस संविधान के आधार पर मामले तय करने होंगे जो हमारी बाइबल, हमारी गीता, हमारे कुरान, हमारे गुरु ग्रंथ साहिब और अन्य ग्रंथ हैं।

जस्टिस दीपक गुप्ता ने कहा कि ”42 साल तक पेशे में रहने के दौरान मैंने इसके हर एक पल का आनंद लिया. हालांकि कोर्ट से रिश्ता खत्म हो गया लेकिन बार के साथ मेरा रिश्ता कभी खत्म नहीं हो सकता। हालांकि मैं पेशे को छोड़ने के लिए दुखी हूं, मुझे खुशी है कि मेरे पास परिवार और खुद के लिए अधिक समय होगा। मुझे कुछ समय मिलेगा पढ़ने के शौक को पूरा करने का और आगे बढ़ने का। मैं जज के रूप में जितना कमाता था, उससे कुछ ज्यादा पैसा कमाने के लिए भी मिलेगा।”

जस्टिस गुप्ता त्रिपुरा हाईकोर्ट के पहले चीफ जस्टिस बने थे। वे हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के जज भी रह चुके हैं। 2017 में सुप्रीम कोर्ट के जज बने थे। सुप्रीम कोर्ट के तीन साल में उन्होंने कई अहम फैसले दिए। नाबालिग पत्नी की सहमति के बावजूद सेक्स को दुष्कर्म माना जाएगा, यह फैसला भी जस्टिस गुप्ता ने ही दिया था।

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