जवाहर लाल यूनिवर्सिटी (जेएनयू) के छात्र उमर खालिद ने कहा कि अगर मोदीभक्ति ही देशभक्ति का पैमान हैं तो उन्हें देशद्रोही कहलाना ही पसंद हैं.

उन्होंने कहा कि आज की तारीख में सिस्टम और सरकार पर सवाल नहीं उठाना यानी मोदीभक्ति ही देशभक्ति का पैमाना बन गया है. खालिद ने कहा कि अगर यही पैमाना सही है, तब तो पूरा देश देशद्रोही है, सभी को कैदकर जेल की सलाखों के पीछे बंद कर दिया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि जब लोग सरकार पर सवाल करना बंद कर देंगे और यही देशभक्ति का पैमाना होगा तब हम सभी लोग देशभक्त नहीं देशद्रोही कहलाना पसंद करेंगे क्योंकि वो देशभक्ति नहीं मोदीभक्ति होगी. खालिद कहते हैं कि यहां सड़कों पर इंसाफ होता है, जैसा दादरी में अखलाक के साथ हुआ. उन्होंने कहा कि जुर्म तो बाद में साबित होगा लेकिन जब आपको मार ही देंगे तब आप अपनी बेगुनाही कैसे साबित करोगे. लिहाजा संघर्ष करना जरूरी है.

खालिद ने बताया कि जेएनयू विवाद के समय उसे इस्लामिक आतंकवादी के तौर पर शासन-प्रशासन ने देखा. उन्होंने सवालिया लहजे में पूछा कि क्या एक मुसलमान अच्छा भारतीय नहीं हो सकता? उन्होंने बाबरी विध्वंस की बात उठाते हुए कहा कि तब उनकी उम्र मात्र पांच साल थी, तब उन्होंने अपने आस-पड़ोस सभी जगह विरोध स्वरूप काले झंडे देखे थे, तब तो सभी मुसलमानों को किसी ने देशद्रोही नहीं समझा.

उमर कहते हैं कि जेएनयू विवाद के समय 11 फरवरी से 23 फरवरी तक वो अपने कुछ दोस्तों के साथ छिपकर जीवन गुजार रहे थे. तब कुछ लोगों ने कहा था कि जब तुमने गलत किया ही नहीं तो फिर छिपना क्यों? कानून का सामना करो और फिर हमने कानून का सामना किया और कर रहे हैं. उमर ने कहा कि जब उन पर 56 केसेज और देशद्रोह का मुकदमा चल रहा है.


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