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Hyderabad University के SC/ST टीचर्स का आरोप है कि Rohit Vemula के मामले में Smriti Irani ने देश को गुमराह किया

New Delhi, Jan 21 : Hyderabad University के दलित छात्र Rohit Vemula को कथित तौर पर खुदकुशी के लिए मजबूर करने का मामला और भी ज्यादा गंभीर होता जा रहा है। यूनिवर्सिटी के 10 से ज्यादा प्रोफेसर्स ने विश्वविद्यालय में अपनी प्रशासनिक भूमिका से इस्तीफा दे दिया है। ये सभी शिक्षक एससी/एसटी वर्ग हैं और केंद्रीय मानव संसाधान विकास मंत्री Smriti Irani के बयान से नाराज हैं। Smriti Irani ने कहा था कि यूनिवर्सिटी की दलित फैकल्टी भी उस जांच कमेटी का हिस्सा थी जिसकी वजह से 5 छात्रों को सजा दी गई थी।

दरअसल Rohit Vemula समेत 5 छात्रों को सस्पेंड करने, यूनिवर्सिटी के हॉस्टल से निकालने और सार्वजनिक जगहों पर जाने को लगाई पाबंदी जैसी सजा शुरू से ही सवालों के घेरे में है। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने बुधवार को इस मामले पर कहा था कि प्रोटोकॉल कमेटी से लेकर Executive Council और उसकी सबकमेटी तक कई स्तरों पर यूनिवर्सिटी के दलित प्रोफेसर छात्रों को निकालने संबंधी फैसले में शामिल थे। Smriti Irani के इस बयान के यूनिवर्सिटी के दलित प्रोफेसरों ने सरासर गलत बताया। विश्वविद्यालय के SC/ST टीचर्स एंड ऑफिसर फोरम के सदस्य और डीन ऑफ स्टूडेंट वेल्फेयर प्रकाश बाबू ने तो बेहद सख्त शब्दों में कहा कि मंत्री जी देश को गुमराह कर रही हैं।

उनका कहना था कि जब से यूनिवर्सिटी की स्थापना हुई है उसकी Executive Council में दलितो का प्रतिनिधित्व ही नहीं है, ऐसे में मंत्री इस तरह की बात कैसे कह सकती हैं। उन्होंने ये भी बताया कि विश्वविद्यालय के करीब 20 SC/ST शिक्षक नौकरी से इस्तीफा देने को तैयार थे, लेकिन फिर उन्होंने सोचा कि इससे छात्रों को कोई फायदा नहीं होगा बल्कि उल्टे उनकी लड़ाई कमजोर होगी इसलिए सिर्फ प्रशासनिक पदों को छोड़ने का फैसला किया गया।SC/ST टीचर्स एंड ऑफिसर फोरम ने बाकायदा एक विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि जिस जांच कमेटी की वजह से छात्रों को सजा दी गई ‘ कार्यकारी परिषद की उस सबकमेटी का नेतृत्व ऊंची जाति के एक प्रोफेसर विपिन श्रीवास्तव कर रहे थे, उस कमेटी में कोई भी दलित सदस्य है ही नहीं’

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इस रिलीज में ये भी कहा गया है कि इस मामले को गलत दिशा में मोड़ कर स्मृति ईरानी खुद को और बंडारू दत्तात्रेय को Rohit Vemula की मौत की जिम्मेदारी लेने से बचाने की कोशिश कर रही हैं।दलित शिक्षकों का इस तरह से टकराव के लिए सामने आ खड़ा होना और शिक्षा विभाग की केंद्रीय मंत्री Smriti Irani के दावों को गलत ठहरा देने से इस मामले ने नया मोड़ ले लिया है। सवाल ये है कि क्या स्मृति ईरानी ने बिना तथ्यों को जाने ही बयान दे दिया कि इतनी बड़ी यूनिवर्सिटी की कमेटी में कहीं ना कहीं दलित सदस्य तो होंगे ही, या फिर उन्होंने जानबूझ कर तथ्यों की अनदेखी की।

बहरहाल शिक्षको का प्रशासनिक कार्यों से इस्तीफे की घटना एक बड़ी शुरूआत है, इस रोकने के लिए जरूरी कदम जल्दी ही नहीं उठाए गए तो ये कुछ दिनों पहले ‘अवार्ड वापसी अभियान’ से भी बड़ा मसला बन सकता है, क्योंकि अवार्ड वापसी में सरकार के पास कहने के लिए था कि ये बिहार चुनावों की वजह से हो रहा है, लेकिन हैदराबाद में तो एक दलित छात्र की मौत का मामला है। जल्दी न बुझाई गई तो इस आग को शिक्षा के दूसरे प्रतिष्ठानों तक पहुंचने में देर नहीं लगेगी। Smriti Irani को चाहिए कि वो Rohit Vemula मामले को ज्यादा समझदारी से डील करें और जो करें वो तेज गति से हो और फलप्रद हो।

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