Monday, January 24, 2022

मोदी सरकार ने एससी-एसटी समुदाय का आरक्षण 10 साल बढ़ाया, विधेयक को दी मंजूरी

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संसद ने गुरुवार को लोकसभा और राज्यों की विधानसभा में अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति समुदायों को दिये गये आरक्षण को दस वर्ष बढ़ाकर 2030 तक करने के प्रावधान वाले संविधान संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी।

राज्यसभा ने संविधान (126वां संशोधन) विधेयक-2019 को उच्च सदन में मौजूद सभी 163 सदस्यों के मतों से मंजूरी प्रदान की। लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है। एससी एवं एसटी वर्ग को लोकसभा एवं राज्यों की विधानसभा में दिए गये आरक्षण की वर्तमान सीमा 25 जनवरी 2020 को समाप्त हो रही है।

बिल पर चर्चा के दौरान कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा- भाजपा समाज के इन वर्गों को आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध है और इसे कभी नहीं हटाया जाएगा। लोकसभा में आरक्षण को लेकर पेश किया गया ‘संविधान (126वां संशोधन) विधेयक 2019’ के पक्ष में 355 वोट पड़े और इसके खिलाफ किसी ने वोट नहीं दिया।

उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार इन वर्गों में क्रीमी लेयर का प्रावधान लाने के पक्ष में भी बिल्कुल नहीं है। सरकार ने एटार्नी जनरल के माध्यम से कहा है कि क्रीमी लेयर के बारे में उच्चतम न्यायालय में जो मामले विचाराधीन हैं, उन्हें किसी बड़ी पीठ में भेजा जाए।

विधि एवं न्याय मंत्री ने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का पूरा समाज ही पिछड़ा है, ऐसे में इसे दो भाग में बांटने की जरूरत नहीं है और क्रीमीलेयर की एससी/एसटी समाज में जरूरत नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि भाजपा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के आरक्षण के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और यह आरक्षण कभी भी नहीं हटाया जायेगा ।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा- संविधान संशोधन विधेयक सदन के पूर्ण बहुमत से पारित हुआ। वोटिंग के दौरान इसे कम से कम दो तिहाई सदस्यों का समर्थन मिलना जरूरी था, लेकिन सभी मत संशोधन के पक्ष में रहे।

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