भागलपुर | भ्रष्टाचार इस देश की जड़ो में कितना घुस चूका है इसकी एक बानगी मंगलवार को बिहार में देखने को मिली. यहाँ करीब 40 सालो से बन रही एक नहर का बाँध, उद्घाटन से एक दिन पहले धरासाई हो गया. बाँध के टूटने से नजदीक में बने CISF के क्वार्टर में पानी भरने लगा. जिसकी वजह से जवानो में अफरातफरी मच गयी. फ़िलहाल इस मामले में कोई भी अधिकारी या सत्ताधारी पार्टी का नेता कुछ भी बोलने के लिए तैयार नही है.

साल 1977 में बिहार के भागलपुर में शुरू हुई बटेश्वर स्थान गंगा पंप नहर परियोजना अपनी अंतिम पड़ाव में है. इस परियोना को बिहार और झारखण्ड के कई हिस्सों की सिचाई की समस्या को दूर करने के लिए शुरू किया गया था. बताया जाता है की बटेश्वर नहर के शुरू होने से बिहार के भागलपुर जिले की 18620 हेक्टेयर और झारखंड के गोड्डा ज़िले की 22658 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई हो सकेगी.

शुरुआत में यह परियोजना केवल 14 करोड़ रूपए में बनकर तैयार होनी थी. लेकिन इस पर अभी तक करीब 390 करोड़ रूपए खर्च हो चूका है. इसमें से भी कितना पैसा नहर पर खर्च हुआ है वह मंगलवार को सामने आ गया. जब कहलगाँव एनटीपीसी आवासीय एरिया सीआईएसएफ क्वाटर के नजदीक बने बाँध का करीब 6 हिस्सा टूट गया. बाँध टूटने से CISF क्वार्टर में पानी भर गया. गनीमत है की यह पानी गाँव की तरफ आया.

अधिकारिक सूत्रों के अनुसार इस बाँध का उद्घाटन को बुधवार को मुख्यमंत्री नितीश कुमार के हाथो होना था. लेकिन बाँध टूटने के बाद यह कार्यक्रम रद्द कर दिया गया. फ़िलहाल इस मामले में पीरपैंती के विधायक रामविलास पासवान ने इंजिनियर और ठेकेदार को जिम्मेदार ठहराया है. उधर कोई भी प्रशासनिक अधिकारी मामले में बोलने के लिए तैयार नही है. लेकिन विपक्ष को बैठे बिठाए एक मुद्दा जरुर मिल गया है.

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