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उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में न्याय नहीं मिलने से नाराज मुस्लिम परिवार के 20 लोगों द्वारा हिंदू धर्म अपनाने को लेकर गुरुवार को गांव के मुस्लिम समाज के लोगों ने पंचायत आयोजित की। इस दौरान समुदाय के लोगों ने हिंदू संगठनों पर साजिश का आरोप लगाया। पंचायत ने इस मामले में जल्द ही 7 गांवों की खाप पंचायत बुलाने की चेतावनी दी।

बता दें कि हिंदू युवा वाहिनी (भारत) की देखरेख में धर्मगुरु ने हवन कराकर 13 लोगों को विधिवत रूप से हिंदू धर्म स्वीकार कराया गया। धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों ने एसडीएम को इस संबंध में शपथपत्र भी सौंपे। जिसकी पुष्टि जिलाधिकारी ने भी की।

मामला छपरौली थाना क्षेत्र के बदरखा गांव का है। गांव के ही रहने वाले अख्तर अली का बेटा कपड़े का व्यापार करता था। जुलाई माह में उनके बेटे गुलहशन अली का शव उनकी ही दुकान में खूंटी पर लटका हुआ मिला था। परिजनों का आरोप था कि मुस्लिम समाज के ही कुछ दबंगों ने उसकी हत्या करने के बाद शव को खूंटी पर लटका दिया था लेकिन पुलिस ने उनकी एक न सुनी और हत्या को आत्महत्या में दर्ज कर शव को जबरन दफन करवा दिया।

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हालांकि बागपत के एसपी शैलेश पांडे कहते हैं कि इस परिवार ने पुलिस को सूचित किए बिना ख़ुद ही शव को उतारा और नहलाकर दफ़नाने चल दिया।

शैलेश कहते हैं, ”गांव से ही पुलिस को फ़ोन आया कि गुलशन नाम के व्यक्ति का शव मिला है और घर वाले दफ़नाने ले जा रहे हैं। पुलिस की गाड़ी वहां पहुंची तो क़ब्रिस्तान के रास्ते से शव को पोस्टमॉर्टम के लिए लाया गया। ये इस मामले में ख़ुद ही संदिग्ध हैं। इन्होंने पुलिस को बिना बुलाए शव क्यों उतारा? ये दफ़नाने में इतनी जल्दबाजी क्यों कर रहे थे? इन्होंने जो एफ़आईआर लिखवाई है उसमें भी यही कहा है कि उनके बेटे का शव लटका हुआ मिला।”

खूबीपुर निवाडा के लोगों का कहना है कि गुलशन ने ख़ुदकुशी की थी क्योंकि उसकी पत्नी को घर वाले एक साल से आने नहीं दे रहे थे। मुश्किल वक़्त में कौम के साथ नहीं देने के आरोप पर गांव वालों का कहना है कि अगर ऐसा होता तो क़ब्रिस्तान में शव को दफ़नाने ही नहीं दिया जाता।

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