असम में सरकारी मदरसों और संस्कृत स्कूल को मिलने वाली सरकारी मदद पर पूरी तरह से रोक लगाने वाले प्रस्ताव को आज विधान सभा में पेश कर दिया गया।

मंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोमवार को कहा कि आज मैं विधानसभा में मदरसों को लेकर विधेयक पेश करूंगा। इस विधेयक के पास होने के बाद असम में सरकारी मदरसों का संचालन बंद हो जाएगा, जो कि असम की स्वतंत्रता के पहले से चल रहा था।

बता दें कि असम कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को पहले ही मंजूरी दे दी थी। इससे पहले सरमा ने कहा था, ‘यह राज्य की शिक्षा प्रणाली को धर्मनिरपेक्ष बनाएगा। हम स्वतंत्रता पूर्व भारत के दिनों से इस्लामी धार्मिक अध्ययनों के लिए सरकारी धन का उपयोग करने की प्रथा को समाप्त कर रहे हैं। मदरसों को सामान्य स्कूलों में परिवर्तित कर दिया जाएगा। इस तरह के 189 सरकारी स्कूलों से मदरसा शब्द को हटा दिया जाएगा। 1 अप्रैल 2021 से सभी धार्मिक पाठ्यक्रमों को रोक दिया जाएगा। एसईबीए 2021 में अंतिम मदरसा परीक्षा आयोजित करेगा।’

सरमा ने कहा था कि अरबी कॉलेजों को उच्च माध्यमिक विद्यालयों में परिवर्तित किया जाएगा और अरबी परिषद के सभी अधिकारियों को असम उच्चतर माध्यमिक शिक्षा परिषद (एएचएसईसी) में स्थानांतरित किया जाएगा और उन संस्थानों में सामान्य परिषद शिक्षा शुरू की जाएगी। दूसरी ओर प्री-सीनियर और सीनियर मदरसों को राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के पाठ्यक्रम का पालन करना होगा।

वहीं, भाजपा के वरिष्ठ नेता और विधानसभा के उपाध्यक्ष अमीनुल हक लस्कर ने कहा था कि मदरसे निजी पार्टियों द्वारा चलाए जाते हैं, इन (निजी) मदरसों को बंद नहीं किया जाएगा। मतलब, सामाजिक संगठनों और अन्य गैर सरकारी संगठनों द्वारा चलाए जा रहे प्राइवेट मदरसे चलते रहेंगे।

Loading...
विज्ञापन
अपने 2-3 वर्ष के शिशु के लिए अल्फाबेट, नंबर एंड्राइड गेम इनस्टॉल करें Kids Piano