मुंबई | अभी हाल ही में अदालत ने दो ऐसे फैसले दिए है जिसके बाद देश की न्याय प्रणाली पर सवाल उठाना लाजिमी है. दिल्ली हाई कोर्ट ने एक शख्स को 12 साल बाद आरोप मुक्त करते हुए रिहा करने का आदेश दिया. यह शख्स पिछले 12 साल से आतंकवाद फैलाने के आरोप में जेल में बंद था. एक ऐसा ही फैसला मुंबई की सत्र अदालत ने भी सुनाया है.

सत्र अदालत ने 11 साल पहले पकडे गए सिमी के 5 कार्यकर्ताओ को सबूतों के आभाव में बरी करने का आदेश दिया है. अदालत ने सभी आरोपियों को आरोप मुक्त करते हुए बरी करने का आदेश दिया. सभी आरोपियों पर आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के साथ कथित सम्बन्ध रखने और 2006 में मुम्बई में हुए सीरियल ट्रेन ब्लास्ट में संलिप्त होने का आरोप था.

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2006 में हुए विस्फोट के बाद जांच एजेंसी ने कई लोगो को गिरफ्तार किया जिसमे से 5 लोग प्रतिबंधित संगठन सिमी के सदस्य थे. अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा की अपराध शाखा डीसीबी सीआईडी ​​यूनिट 11 ने मामले को गंभीरता से नही लिया. यही नही अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने में भी नाकाम रहा है . इसलिए अदालत ने सभी आरोपियों को आरोप मुक्त करते हुए बरी करने का आदेश दे दिया.

रिहा होने वालो में इरफान अली अंजुमन सैयद, मोहम्मद नजीब अब्दुल राशिद बाकली, फिरोज अब्दुल लतीफ घासवाला, मोहम्मद अली मोहम्मद चाँद छीपा और इमरान निसार अहमद अंसारी शामिल है. इनमे से घासवाला और छिपा पर आरोप था की ये दोनों राहिल शेख ( ट्रेन विस्फोट का फरार आरोपी) के साथ पाकिस्तान गए और वहां लश्कर-ए-तैयबा ने इन्हें बम बनाने और एके-47 चलने का प्रशिक्षण दिया. हालाँकि अभियोजन पक्ष इस मामले में कोई सबूत पेश नही कर सका.

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