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बीते दिनों केरल के पलक्कड़ जिले में एक आदिवासी व्यक्ति को एक किलो चावल चुराने के आरोप में स्थानीय लोगों ने पीट-पीट कर मौत के घाट उतार दिया था. इस मामले को मशहूर क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की. लेकिन जब सामने आया तो फिर मांगी मांगकर मामला रफा-दफा कर दिया.

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दरअसल, सहवाग ने इस मामले में ट्वीट कर कहा कि ‘मधु ने एक किला चावल चुराया था. उबैद, हुसैन और अब्दुल करीम की भीड़ ने इस गरीब आदिवासी को मौत के घाट उतार दिया. ये एक सभ्य समाज के नाम पर कलंक है. मुझे शर्म आती है कि ये सब हुआ और किसी को कोई फर्क भी नहीं पड़ता.’

इस ट्वीट में सहवाग ने तीन मुस्लिम आरोपियों के नाम देकर इस घटना को मुस्लिमों से जोड़ने की कोशिश की. जबकि इस हत्याकांड में अब तक पुलिस 16 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. जिसमें अन्य संप्रदायों के लोग भी शामिल हैं. ऐसे में जब लोगों ने सहवाग से सवाल किया कि  आप इस भयावह अपराध के पीछे धर्म क्‍यों देख रहे हैं.

इसके बाद सहवाग ने दूसरा ट्वीट करते हुए कहा कि मैं माफी चाहूंगा कि मुझसे और लोगों के नाम अधूरी जानकारी की वजह से छूट गए मैं इसके लिए तहेदिल से माफी मांगता हूं लेकिन मेरा ट्वीट किसी भी तरह से सांप्रदायिक नहीं था. हत्यारे धार्मिक रूप से अलग भले हों लेकिन हिंसक मानसिकता की वजह से वे एक हैं.

बता दें कि कडूकुम्न्ना निवासी 27 वर्षीय आदिवासी युवक ए.मधु को कुछ लोगों ने गुरुवार शाम को जंगल से पकड़ा था. वे उसे पीटते हुए बाहर लाए और उसे रस्सियों से बांध दिया और उसकी बेदर्दी के साथ पीटाई की गई. इलाज के लिए जब उसे अस्पताल ले जाया गया तो उसने दम तोड़ दिया. इस दौरान लोग बचाने के बजाय उसके साथ सेल्फी लेते रहे.