बॉलीवुड की जानी-मानी अदाकारा शर्मिला टैगोर जश्ने-रेख्ता में अंतिम दिन शामिल हुई. इस दौरान उन्होंने उर्दू की मोजुदा हालात पर चिंता जाहिर की. उन्होंने कहा कि उर्दू में ठहराव आ गया है. यह सिर्फ मुस्लिमों की भाषा बनकर रह गई. उन्होंने कहा आज यह सिर्फ मुसलमानों द्वारा ही बोली जाती है.

टैगोर ने आगे कहा, उर्दू जुबान भारतीय इतिहास का एक अहम हिस्सा रही है. कभी दिल्ली में बड़े पैमाने पर बोली जाने वाली उर्दू जुबान को भी बंटवारे का दंश झेलना पड़ा. एक तरफ पाकिस्तान में इसे आधिकारिक भाषा घोषित कर दिया गया वहीं भारत में यह भाषा एक दायरे में सिमट कर रह गई.

वहीँ ससुराल गेंदा फूल और तारे जमीन पर जैसे गीत लिखने वाले प्रसून जोशी ने कहा कि बॉलीवुड में लिखे जा रहे गीतों की गुणवत्ता खराब होती जा रही है. बॉलीवुड में सिर्फ मनोरंजन के लिए गीत लिखे जा रहे हैं, इससे कविता खोती जा रही है.

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उन्होंने बताया कि सिर्फ नृत्य और मनोरंजन के लिए गीत लिखने का प्रस्ताव उनके सामने कई बार आया, लेकिन उन्होंने प्रस्ताव ठुकरा दिए.

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