पोर्न रैकेट मामले में शर्लिन चोपड़ा को नहीं मिली मुंबई कोर्ट से अग्रिम जमानत

मुंबई की एक सत्र अदालत ने बॉलीवुड अभिनेत्री शर्लिन चोपड़ा को पोर्न वीडियो रैकेट मामले में अग्रिम जमानत देने से इंकार कर दिया है। उन्हे अब मुंबई पुलिस ने गवाह के रूप में अपना बयान दर्ज करने के लिए बुलाया है।

शर्लिन चोपड़ा के वकील ने अदालत को बताया कि जमानत याचिका इसलिए दायर की गई कि चोपड़ा को डर था कि उन्हें अन्य आरोपियों की तरह गिरफ्तार किया जाएगा, और इसलिए पुलिस के पास जाने से पहले अदालत से सुरक्षा मांगी थी। वकील ने कहा कि अभिनेत्री जांच से पीछे नहीं हट रही है।

शर्लिन चोपड़ा के वकील सिद्धेश बोरकर ने अग्रिम जमानत के लिए दलील दी और अदालत से कहा, “जहां तक ​​2021 की प्राथमिकी का सवाल है, चोपड़ा ने कहा कि वह गुण-दोष पर टिप्पणी नहीं कर सकतीं क्योंकि उन्हें न तो प्राथमिकी की प्रति दी गई थी और न ही उन्हें सूचित किया गया था। । हालांकि, पुलिस द्वारा सह-आरोपी को गिरफ्तार किए जाने के बाद से उसने मामले में गिरफ्तारी की आशंका जताई है।”

हालांकि, सरकारी वकील ने अदालत से कहा कि वे केवल शर्लिन चोपड़ा का बयान दर्ज करना चाहते हैं। पोर्न फिल्म रैकेट मामले में प्राथमिकी भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं और महिलाओं के अश्लील प्रतिनिधित्व (निषेध) अधिनियम के प्रावधानों के तहत दर्ज की गई थी।

शर्लिन चोपड़ा को 26 जुलाई को व्हाट्सएप के जरिए समन जारी किया गया था। शर्लिन चोपड़ा इस बात से आशंकित थीं कि ससही तथ्यों की जानकारी के बिना उन्हें पोर्न फिल्म रैकेट मामले में फंसाया जा सकता है। अपने आवेदन में, चोपड़ा ने  कहा कि चूंकि प्राथमिकी में कुछ अपराध गैर-जमानती थे, इसलिए उन्होंने इस आधार पर अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दी थी कि उनकी हिरासत पूरी तरह से अनुचित है।

शर्लिन चोपड़ा ने यह भी कहा कि नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों में यह शामिल होगा कि उन्हें बिना किसी पूर्वाग्रह के उक्त जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने का उचित और निष्पक्ष अवसर दिया जाए और उनके खिलाफ या अन्यथा पूरे मामले की जानकारी दी जाए ताकि उन्हें गिरफ्तारी के डर के बिना जांच प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए सक्षम बनाया जा सके।।

उनके वकील ने तर्क दिया, “नोटिस के अवलोकन पर चोपड़ा को ऐसा लगा कि यदि उक्त मामला इलेक्ट्रॉनिक रूप में है, तो इसे कथित डिवाइस या उपकरण या कंप्यूटर प्रोग्राम की जांच के माध्यम से पुनर्प्राप्त किया जा सकता है और इस तरह की हिरासत में इलेक्ट्रॉनिक रूप में डेटा की वसूली के उद्देश्य के लिए आवेदक की आवश्यकता नहीं होगी।”

चोपड़ा को पहले ही मुंबई पुलिस के साइबर सेल द्वारा 2020 में दर्ज की गई प्राथमिकी में आरोपी के रूप में पेश किया जा चुका है। जांच अधिकारी ने इसमें इसी तरह का समन नोटिस जारी किया था। जिसके बाद उन्होने अग्रिम जमानत के लिए सत्र न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था और जब भी इसे खारिज कर दिया गया था, फिर उन्होने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। चोपड़ा को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा इस आश्वासन के साथ दी गई थी कि वह जांच में सहयोग करेंगी। सुरक्षा 20 सितंबर, 2021 तक बढ़ा दी गई है।

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