गाँधी जयंती पर ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ हुई बॉलीवुड अभिनेता नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी (Nawazuddin Siddiqui) की फिल्म ‘सीरियस मैन’ को लेकर काफी चर्चा है। फ़िल्म में वर्ग, रंगभेद और जाति के आधार पर होने वाले भेदभाव को दिखाया गया है। ऐसे में अब नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी ने समाज में फैली इस जाति के मकड़जाल को तोड़ने की अपील की।

सिद्दीकी ने कहा है कि हमारे समाज में जातिगत भेदभाव की जड़ें बहुत गहरी हैं। उन्होंने आपबीती बताते हुए कहा कि उनकी दादी की जाति के कारण अभी भी उनके गाँव में कुछ लोगों द्वारा उनके परिवार को स्वीकार नहीं किया गया है। बता दें कि फ़िल्म में लीड रोल में नजावुद्दीन सिद्दीकी, नसार, इंदिरा तिवारी और अक्षत दास हैं।

एनडीटीवी से बातचीत में उन्होने कहा, “मेरी दादी छोटी जाति से ताल्लुक रखती थीं, जबकि मेरा परिवार शेख था। इस वजह से अभी भी गांव के लोग मेरे परिवार को अच्छी नजर से नहीं देखते हैं।” अभिनेता ने कहा कि शहरी संस्कृति में भले ही जातियां गौण हो रही हों लेकिन ग्रामीण भारत में अभी भी जातियों का वर्चस्व हावी है। एक ही समुदाय में छोटी-बड़ी जातियों के बीच भेदभाव जारी है।

उन्होंने कहा कि उनलोगों के ये फर्क नहीं पड़ता कि आप बॉलीवुड एक्टर हैं या धनपति? उन्हें जातियों से मतलब है। अभिनेता ने कहा, “आज भी हम चाहें कि जो हमारे ममेरे रिश्तेदार हैं, उनकी शादी पैतृक रिश्तेदारों में कराऊं तो ये संभव नहीं है।”

सिद्दीकी ने कहा कि सोशल मीडिया का प्रभाव गांव के लोगों पर उतना नहीं है जितना शहरों में है। उन्होंने हाथरस मामले को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया और कहा कि लोगों को इसके खिलाफ आवाज उठानी ही चाहिए।

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