नसीरुद्दीन शाह ने की अपनी किताब लांच, बोले – कोई हमें भेज नहीं सकता पाकिस्‍तान

बुलंदशहर हिंसा पर सवाल उठाने को लेकर हिंदुवादियों के विरोध का सामना कर रहे बॉलीवुड अभिनेता नसीरुद्दीन शाह अपनी किताब ‘नसीर-का-नजीर-फिर एक दिन’ को एक अज्ञात स्थान से लांच किया है। यह इंग्लिस किताब ‘एंड देन वन डे’ का का हिंदी ट्रांसलेशन है।

किताब का विमोचन 21 दिसंबर को ही पुष्कर में एक अज्ञात जगह पर किया। अजमेर लिटरेचर फेस्टिवल (ALF) के आयोजकों ने एक वीडियो जारी किया, वीडियो का टाइटल था “हम इस घटना से शर्मिंदा हैं और पूरी तरह से इसकी निंदा करते हैं।” वीडियो में पुष्कर में आयोजित शाह के सत्र की झलक भी दिखाई गई है। वीडियो में, अनुभवी अभिनेता ने कहा कि इंटरव्यू में उन्होंने अपने डर, समाज में फैलते जहर और कानून व्यवस्था का उल्लेख किया है।

शाह ने कहा, “कई अन्य लोगों ने भी इसी तरह की चिंता व्यक्त की है लेकिन केवल मुझे देशद्रोही कहा जा रहा है, मेरे पुतले जलाए जा रहे हैं और मुझे पाकिस्तान जाने के लिए टिकट भेजा गया है। वीडियो में कहा गया है कि अगर मैं अपने देश की आलोचना करता हूं तो यह वास्तव में मेरे लिए बहुत दर्दनाक है। यह मुझे खुश नहीं करता है। लेकिन, अगर मैं कुछ गलत देखता हूं तो बोलना मेरा कर्तव्य बन जाता है। यह मेरी मातृभूमि है, यह मेरा घर है और मैं इस देश के भविष्य के लिए चिंतित हूं।”

पाकिस्तान भेजने की धमकी देने वालों को लेकर शाह ने कहा, “कोई भी मुझे पाकिस्तान नहीं भेज सकता। भारत मेरा देश है और मैं अपने देश से प्यार करता हूं। मेरे परिवार की पांच पीढ़ियां इस भूमि पर रहीं और मर गईं और यहां तक ​​कि मेरे बच्चे भी इस देश में रहेंगे क्योंकि यह मेरी मातृभूमि है।”

नसीरुद्दीन ने कहा कि, “अजमेर में अपनी पुस्तक का विमोचन करने की उनकी इच्छा थी, एक ऐसा शहर जहां उन्होंने अपनी 10 साल से 15 साल के होने तक की उम्र बिताई। अपनी जिंदगी के 5 साल बिताए। हालांकि मैं मेरठ का मूल निवासी हूं, लेकिन मैं हमेशा से अजमेर से जुड़ा रहा हूं, यह शिक्षकों और सद्भाव की भूमि है। मेरी पुस्तक अजमेर और मेरे स्कूल सेंट एंसलम्स के सीनियर सेकेंडरी स्कूल के बारे में भी है। यही कारण है कि मैं इसका विमोचन यहां करना चाहता था लेकिन ….., ” उनकी पत्नी रत्ना पाठक हस्तक्षेप करती हैं और कहती हैं कि कोई बात नहीं, यह पुष्कर में हो रहा है।

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