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हाल ही में भारतीय टीम में शामिल होने वाले बाएं हाथ के तेज गेंदबाज खलील अहमद ने खुद को खुशकिस्मत बताया है कि उन्हें महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में खेलने का मौका मिला। साथ ही अहमद को ये भी दुख था कि वो दिग्गज कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई में नहीं खेल पाएंगे।

दरअसल, एशिया कप 2018 के दौरान खलील जब भारतीय स्क्वाड में शामिल हुए तब तक धोनी को कप्तानी छोड़े एक साल हो चुका था। लेकिन खलील की किस्मत ऐसी रही कि हांगकांग के खिलाफ मैच में शानदार डेब्यू करने के बाद उन्हें अफगानिस्तान के खिलाफ मैच में धोनी की कप्तानी में खेलने का मौका मिला।

एशिया कप में अफगानिस्तान के खिलाफ टीम ने फाइनल से पहले कप्तान रोहित शर्मा और उप-कप्तान शिखर धवन को आराम दिया था। ऐसे में धोनी को कप्तानी करने का मौका मिला था। उस मैच में खलील मैदान पर उतरे थे। वह उनका दूसरा अंतरराष्ट्रीय मैच था।

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खलील ने एक इंटरव्यू में कहा, ‘मेरी ख्वाहिश थी कि मैं धोनी की कप्तानी में खेलूं लेकिन वह कप्तानी पहले ही छोड़ चुके थे। शायद यह मेरी किस्मत ही थी कि वह एक मैच के लिए कप्तान बने और मैं उनकी कप्तानी में खेला। इसमें खुशी बात और यह थी कि इस मैच में हम तीन तेज गेंदबाज खेले थे और धोनी में मुझे पहला ओवर करने के लिए चुना था।’

मैच के दौरान एक समय भारत ने नौ विकेट खो दिए थे, तब खलील ने बल्लेबाजी के लिए उतरे। उन्होंने कहा कि उस समय वो सिर्फ दूसरे छोर पर खड़े रवींद्र जड़ेजा को स्ट्राइक देने के बारे में सोच रहे थे। उन्होंने कहा, “मुझ पर दबाव था क्योंकि नौ विकेट गिर गए थे और अगर मैं आउट हो जाता तो हम मैच हार जाते। इसलिए मेरी कोशिश सामने खड़े जड़ेजा को स्ट्राइक देने की थी।”

अपने लक्ष्य के बारे में बताते हुए खलील ने कहा, “मैं टीम का अहम गेंदबाज बनना चाहता हूं। मैं ऐसा गेंदबाज बनना चाहता हूं कि कप्तान टीम को किसी भी स्थिति में बाहर निकालने के लिए अगर किसी गेंदबाज को देख रहा है तो उसके दिमाग में सबसे पहला नाम मेरा आना चाहिए। न उसे सोचना पड़े ने देखना पड़े। वो आए और मुझे गेंद दे। मैं ऐसा गेंदबाज बनना चाहता हूं।”

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