न्यूयॉर्क – सुशांत सिंह राजपूत आत्महत्या केस मीडिया में इतना अधिक उछाला गया की इसकी आंच भारत से बाहर निकलकर अमेरिका तक पहुच गयी, जिसके बाद प्रसिद्ध मिशिगन यूनिवर्सिटी की एक टीम ने इस मामले पर स्टडी करके अपनी रिपोर्ट तैयार की.

इस स्मेंटडी में ट्वीट, youtube विडियो और लेटेस्ट ट्रेंड के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार की गयी जिसमे एक्टर सुशांत सिंह राजपूत से मौत से जुड़े मर्डर थ्योरी को लेकर अध्यन किया गया. यह अनूठी स्टडी बताती है कि एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े केस में ‘मर्डर थ्योरी’ को कुछ निहित राजनेताओं, पत्रकारों और मीडिया हाउसेज ने अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया हो सकता है, जिससे कि अधिक ट्रैक्शन जुटाया जा सके.

इस रिपोर्ट के मुताबिक सुशांत सिंह राजपूत की सुसाइड थ्योरी की बजाय लेकर मर्डर थ्योरी को ज्यादा प्रोमोट किया गया, जिसका कंटेंट बिलकुल निराधार था. “Anatomy of a Rumors: Social Media and Suicide of Sushant Singh Rajput” टाइटल वाली ये प्री-प्रिंट स्टडी बताती है कि राजनेताओं के अकाउंट्स SSR केस में नेरेटिव को सुसाइड से मर्डर में बदलने में अहम रहे. रिसर्च टीम ने करीब 7,000 यूट्यूब वीडियोज और 10,000 ट्वीट्स का विश्लेषण किया, जो करीब 2,000 पत्रकारों और मीडिया हाउसेज और 1,200 राजनेताओं से जुड़े थे.

स्टडी में बताया गया है की राजनेता शुरूआती दौर से ही सुशांत की मौत को आत्महत्या की बजाय मर्डर को पेश करने पर ज्यादा जोर दे रहे थे, जिसके बाद मीडिया में अचानक से यह मुद्दा गर्मा गया. स्टडी में भावनात्मक विश्लेषण बताता है कि राजनीतिक अकाउंट्स ने जुलाई के मध्य में सीबीआई जांच की मांग को लेकर समन्वित प्रयास शुरू किए जबकि पत्रकारों ने अगस्त के शुरू में महाराष्ट्र सरकार विरोधी नेरेटिव को पूरी ताकत लगाकर आगे बढ़ाया.

स्टडी में पाया गया कि बीजेपी से जुड़े अकाउंट्स ‘मर्डर’ शब्द का इस्तेमाल करने में अधिक आक्रामक थे. स्टडी में कहा गया है, “डेटा दिखाता है कि राजनेताओं, खास तौर पर बीजेपी से जो जुड़े थे, ने ‘सुसाइड’ नेरेटिव की जगह ‘मर्डर’ विकल्प प्रस्तावित करने में अहम भूमिका निभाई.”

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