हमारे देश में सिनेमा जगत को पहले से ही समाज का आइना माना जाता रहा है, जब भी समाज में कोई बुराई चर्म पर पहुच जाती है तो उससे सिनेमा के माध्यम से समाज तक पहुचाया जाता है जिससे समाज को उस का सच पता चल सके, आज जब मैं JOLLY LLB 2 देखी तो ये एहसास हुआ के भारतीये सिनेमा अभी मरा नहीं है और आज भी वो सच दिखाने से डरता नहीं है.

मल्टीनेशनल, प्रोडक्ट ब्रांडिंग, कमर्शियलाइज़शन के दौर में जहाँ सिनेमा अपनी असल पहचान खोता जा रहा है, फिल्म के नाम पर अश्लीलता, हुल्लड़बाज़ी और भद्दे गाने को जिस तरह पेश किया जा रहा है वहां लोगो के लिए एक प्रेरक फिल्म बनाना और उसे चलाना बहुत मुश्किल काम हो गया है, कोई भी डायरेक्टर या प्रोडूसर ऐसी फिल्म बनाने का जोखिम कतई नही लेना चाहेगा जा समय के साथ उसका पैसा भी ख़राब और और क़ानूनी पचड़ों में भी फ़साये. इस फिल्म में अक्षय कुमार को एक वकील के किरदार में दिखाया गया है जो पैसे कमाने के लिए कुछ भी कर सकता है, एसे ही पैसे के लालच में वो एक एसी विधवा से पैसे ठग लेता है जिस के पति को पुलिस ने आतंकवादी बता कर फ़र्ज़ी एन्कोउन्टर में शादी के अगले ही दिन मार दिया था.

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जब विधवा को अपने ठगे जाने का पता चलता है तो वो हताष हो कर आत्महत्या कर लेती है इस सब के बाद अक्षय कुमार को अपनी गलती का एहसास होता है और वह उस को इंसाफ दिलवाने निकल पड़ता है और हिंदी फिल्म में जेसा होता है ना अंत में हीरो की जीत होती है .

इस फिल्म में जिस सच को उजागर किया गया है वह है समाज में मनमाने ढंग से हो रहे मुस्लिम नोजवानो के फ़र्ज़ी एन्कोउन्टर कभी उन्हें झूठे केसों में फस कर ज़िन्दगी भर के लिए जेल में डाल दिया जाता है तो कभी आतंकवादी बता कर दिन दहाड़े मार दिया जाता है और उनकी कोई पैरवी भी नहीं होती है .

लेकिन अब हमारा समाज जागरूक हो चूका है और आज कल आप देख रहे हैं आये दिन कोई न कोई बेगुनहा दस या बीस साल की लम्बी लड़ाई के बाद बेगुनहा साबित हो कर जेल से आज़ाद हो रहा है.

आजकल के कमर्शियल सिनेमा में जिस तरह एक संवेदनशील मुद्दा उठाया गया है उसे बड़े परदे पर दिखाने के लिए हिम्मत चाहिए, क्यों की पिछले कुछ दिनों से फिल्मकारों पर हमले की ख़बरें भी सुनाई दे रही है. इस फिल्म में एक सीन ऐसा भी आता है जब कातिल को बचाने के लिए देशभक्ति का सहारा लिया जाता है जिसका अक्षय कुमार बहुत प्यारा जवाब देते है..

फिल्म अच्छी बन पड़ी है अगर पिछली जॉली एल एल बी से तुलना की जाए तो जहाँ पहली फिल्म गुदगुदाती है वहीँ इस बार फिल्म दिमाग पर गहरी चोट पहुंचाती है,

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