Tuesday, August 3, 2021

 

 

 

कोरोना के खौफ ने सभी को डरा के रखा हुआ है। ऐसे में लोग अपने परिजनो का अंतिम संस्कार करने से भी हिचक रहे है। इसी बीच गिरिडीह के मुस्लिम युवकों ने गंगा-जमुनी तहजीब का एक बेहतरीन मिसाल पेश की है। दरअसल, जब 72 वृर्षीय वृद्धा लखिया देवी की मौ’त होने के बाद उनके समाज के लोगों ने कोरोना महामारी से भयभीत होकर अर्थी को कंधा देने से परहेज करते नजर आए, तब बरवाडीह पहाड़ीडीह के मुस्लिम समुदाय के करीब 40-50 युवक आगे आए। और  वृद्धा लखिया देवी के बेटे जागेशवर तूरी और पोते समेत परिवार के कुछ सदस्य से साथ मुस्लिम नौजवानों ने अर्थी को लेकर आठ किमी दूर स्थित भोरणडीहा मुक्तिधाम पार्थिव शरीर को श्मशान घाट तक पहुंचाया। वृद्धा हिन्दु महिला को पार्थिव शरीर को कंधा देने के लिए बरवाडीह के मो. श्मेसर आलम, मो. राजन. मो. राज. मो. बिलाल उर्फ गुड्डन. मो. ताहिद और सलामत समेत कई युवक शामिल थे। जो पूरे हिंदु रीति-रिवाज के अनुसार सजे अर्थी को कंधा देने पहुंचे और वृद्धा के पार्थिव शरीर को दोपहर कड़ी धूप में कंधा देते हुए भोरणडीहा मुक्तिधाम पहुंचाया। जानकारी के अनुसार, 72 वर्षीय वृद्धा लखिया देवी शुगर की बीमारी से कई दिनों से पीड़ित थी। साथ ही वृद्धा लकवा की बीमारी से भी ग्रसित थी। परिजनों ने इलाज के लिए रांची के एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया था। लेकिन स्थिति सुधरने के बजाय बिगड़ता जा रहा था। लिहाजा, परिजन वृद्धा को गिरिडीह वापस ले आएं थे। वहीं शनिवार को वृद्धा की मौ’त हो गई। इस दौरान जानकारी मिलने के बाद मृतिका के सगे-संबधी तो श’व का अंतिम दर्शन के लिए उसके घर पहुंचे थे, लेकिन कोरोना से भयभीत होकर सभी दूर थे। गिरिडीह के मुसमलानों ने वृद्ध हिंदू महिला के पार्थिव शरीर को कंधा देकर हिन्दु-मस्लिम एकता , भाईचारे , प्रेम और करूणा का एक बेहतरीन मिसाल पेश की है।

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इंग्लैंड क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज टिम ब्रेसनेन ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि जब 2011 में ओवल टेस्ट मैच में उन्होंने सचिन तेंदुलकर को आउट किया था तो उन्हें और अंपायर को जान से मारने की ध’मकी मिली थी।

2011 के ओवल टेस्ट मैच में सचिन तेंदुलकर को टिम ब्रेसनेन ने 91 रन पर आउट किया था। इसकी वजह से सचिन अपने अंतर्राष्ट्रीय करियर का 100वां शतक पूरा नहीं कर पाए थे। तब उन्हें एलबीडब्ल्यू आउट दे दिया गया था। यह बहुत करीबी फैसला था क्योंकि रिप्ले में गेंद लेग स्टम्प के ऊपरी हिस्से को बस छूती दिख रही थी।

ब्रेसनेन ने यार्कशायर क्रिकेट : कवर्स ऑफ पोडकास्ट पर कहा, “उनके नाम 99 अंतर्राष्ट्रीय शतक थे और उस सीरीज में रिव्यू नहीं थे क्योंकि बीसीसीआई तब इसके खिलाफ थी। यह टेस्ट सीरीज का आखिरी मैच था जो ओवल मैदान पर खेला जा रहा था। गेंद (जिस पर सचिन आउट हुए) शायद लेग स्टम्प के बाहर जा रही थी और अंपायर टकर ने उन्हें आउट दे दिया। वे शायद 80 रन के आसपास (91 रन) पर थे और निश्चित तौर पर शतक बना लेते। हमने सीरीज जीत ली और नंबर-1 बन गए।”

इंग्लैंड के लिए 23 टेस्ट और 85 वनडे खेलने वाले ब्रेसनन ने कहा कि इसके बाद उन्हें और अंपायर टकर को जान से मारने की धम’कियां मिलने लगीं। उन्होंने कहा, “हम दोनों को जान से मारने की धम’कियां मिलने लगीं। मुझे और अंपायर को बहुत दिनों बाद तक जान से मारने की धम’कियां मिल रही थीं। मैंने उन्हें ट्विटर पर देखा और उनके (टकर के) घर पर लोग धम’कियों भरे पत्र भेज रहे थे कि आपने उन्हें आउट दे कैसे दिया। कुछ महीनों बाद मैं उनसे मिला उन्होंने कहा भाई मुझे सुरक्षा गार्ड मंगाने पड़े। आस्ट्रेलिया में उन्हें पुलिस सुरक्षा लेनी पड़ी।”

टिम ब्रेसनेन ने कहा कि सचिन तेंदुलकर के 99 शतक पूरे हो चुके थे और उस सीरीज में कोई रेफरल सिस्टम नहीं था, क्योंकि बीसीसीआई तब रेफरल को पसंद नहीं करती थी। ब्रेसनेन ने कहा कि गेंद शायद लेग स्टंप को मिस कर रही थी और ऑस्ट्रेलियाई अंपायर रॉड टकर ने उनको आउट करार दे दिया। हमने वो सीरीज जीती थी और टेस्ट क्रिकेट में नंबर एक बने थे।

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