बर्थडे पर गूगल ने डूडल बनाकर किया बॉलीवुड के ‘मोगैंबो’ को याद

9:54 am Published by:-Hindi News

मोंगैंबो खुश हुआ’ सुनते ही आपके आखों के सामने दिग्‍गज अभिनेता अमरीश पुरी का चेहरा घूमने लगता है। उन्‍होंने अपनी कड़क और रौबदार आवाज से बॉलीवुड में खलनायकी को एक अलग पहचान दी। आज भी बॉलीवुड में ‘विलेन’ का जिक्र तब तक अधूरा रहता है, जब तक उसमें अमरीश पुरी का नाम शामिल न हो।

अपनी रौबदार आवाज और दमदार एक्टिंग के बलबूते कई दशकों तक हिंदी सिनेमा पर राज करने वाले अमरीश पुरी का आज जन्मदिन है। इस मौके पर गूगल ने डूडल बनाकर अमरीश पुरी को याद किया है। उनका जन्‍म पंजाब के नौशेरा गांव में 22 जून 1932 को हुआ था।

अमरीश पुरी ने अपने करियर की शुरूआत श्रम मंत्रालय के नौकरी से की थी। इसके बाद उन्‍होंने नाटकों में अपना जौहर दिखाया। अमरीश पुरी, पृथ्‍वी राज कपूर के ‘पृथ्‍वी थियेटर’ में बतौर कलाकार अपनी पहचान बनाने में सफल हुये। शिमला के बी एम कॉलेज से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखा शुरूआत में वह रंगमंच से जुड़े। बाद में उन्‍होंने फिल्मों की ओर रूख किया।

उन्‍होंने अपने फिल्‍मी करियर की शुरूआत वर्ष 1971 की फिल्‍म ‘प्रेम पुजारी’ से की थी। इस फिल्‍म में उनका रोल बहुत छोटा था। इसके बाद उन्‍होंने फिल्‍म ‘रेशमा और शेरा’ में अमिताभ बच्‍चन के साथ काम किया था। पुरी का सफर वर्ष 1980 के दशक में यादगार साबित हुआ। वर्ष 1987 में आई शेखर कपूर की फिल्‍म ‘मिस्‍टर इंडिया’ में उनके ‘मोंगैंबो’ की खलनायकी भूमिका ने दर्शकों को उनका दीवाना बना दिया।

80 और 90 के दशक में अमरीश बॉलीवुड में बड़े बजट की लगभग सभी फिल्मों का अहम हिस्सा हुआ करते थे। उनकी बुलंद आवाज में विलेन का किरदार बेहतर तरीके से निखार कर आता था। एक्टिंग करते वक्त आंखों से झलकती नफरत और उनकी बेजोड़ अदाकारी के आगे बड़े-बड़े हीरो भी फीके पड़ जाते थे।

अमरीश पुरी ने 12 जनवरी 2005 को इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। अपने पूरे करियर में उन्होंने करीब 400 फिल्मों में काम किया. उनकी आखिरी फिल्म ‘कच्ची सड़क’ थी, जो उनके निधन से करीब डेढ़ साल बाद 2006 में रिलीज हुई थी।

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