नई दिल्ली | करीब 4 साल पहले आई फिल्म जॉली LLB को अगर अरशद वारसी की बहतरीन अदायगी और कॉमेडी टाइमिंग ने हित कराया तो इसका सिक्वल जॉली LLB-2 भी अक्षय कुमार की बेहतरीन अदाकारी के लिए याद की जायेगी. दोनों ही फिल्मे एक तरह से एक जैसी ही है. पहली फिल्म में भी सामाजिक मुद्दों को सामने रखा गया है तो इस फिल्म में भी इसी तरह का सन्देश दिया गया है.

बस फर्क इतना है की उसमे फूटपाथ पर सोये मजदूरे को इन्साफ दिलाने की जद्दोजहद थी तो इस फिल्म में पुलिस एनकाउंटर में मारे गए पति के लिए इन्साफ मांगती पत्नी. सुभाष कपूर निर्देशित दोनों ही फिल्मो में कॉमेडी को भी उसी अंदाज में परोसा गया है जैसे गंभीर मुद्दे को. चाहे वकील अरशद वारसी हो या अक्षय कुमार लेकिन जज की भूमिका में जो समां सौरभ शुक्ला बंधते है वो कोई और नही कर पायेगा.

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कहानी 

लखनऊ में रहने वाला वकील जगदीश्वर मिश्रा उर्फ़ जॉली (अक्षय कुमार) एक बड़े वकील के यहाँ काम करता है. उसके परिवार में पत्नी पुष्पा पाण्डेय (हुमा कुरैशी) और एक बेटा है. तीनो हंसी ख़ुशी अपनी जिन्दगी बिता रहे है. हालाँकि जॉली का सपना बड़ा है , वो चाहता है की कोर्ट में उसका खुद का एक चैम्बर हो. तभी हिना सिद्दीकी (सयानी गुप्ता) जॉली की जिन्दगी में आती है. सयानी के पति को पुलिस , एनकाउंटर में मार गिराती है. हिना अपने पति का केस जॉली से लड़ने को कहती है.

हिना को इन्साफ दिलाने के चक्कर में जॉली को काफी मुसीबत झेलनी पड़ती है. इस दौरान क्या घटनाएं घटित होती है और क्या हिना को इन्साफ मिल पाता है? इसका पता करने के लिए आपको नजदीकी सिनेमा घर में जाकर फिल्म देखनी होगी.

अभिनय और निर्देशन 

फिल्म की युएसपी अक्षय कुमार की अदाकारी है. जिस अंदाज में उन्होंने लखनवी अंदाज को परदे पर जीवित किया है वो प्रशंसनीय है.

अक्षय के अलावा हुमा कुरैशी, सौरभ शुक्ला और अन्नू कपूर ने भी फिल्म में बेहतरीन काम किया है. निर्देशक के रूप में सुभाष कपूर का काम भी बढ़िया है. लखनऊ और बनारस की असल लोकेशन पर फिल्म को फिल्माया गया है. इसके अलावा जहाँ फिल्म में कॉमेडी का भरपूर तड़का है वही कुछ सीन बेहद गंभीर बन पड़े है. फिल्म के संवाद और अक्षय का अंदाज आपको बेहद पसंद आएगा. हमारी तरफ से फिल्म को तीन स्टार.

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