आमिर खान अपनी फिल्मों को लेकर काफी मेहनत करते है। वह साल में एक ही फिल्म करते है। लेकिन उनकी फिल्म साल भर तक ही प्रशंसकों के जहन पर छाई रहती है। अपनी फिल्मों को लेकर आमिर ने कई खुलासे किए।

एक इंटरव्यू में आमिर ने बताया कि उनके लिए फिल्म की स्क्रिप्ट काफी मायने रखती है। आमिर कहते हैं, मेरे लिए तो फाउंडेशन स्क्रिप्ट है और इसके बाद एक बार जब मुझे कहानी पसंद आ जाती है और फिर मैं फिल्म साइन कर देता हूं। उन्होने ये भी कहा कि वे फिल्म की सारी जिम्मेदारी सिर्फ निर्माता पर नहीं छोड़ते है।

उन्होने बताया कि मेरी पूरी कोशिश होती है कि मेरी वजह से प्रोड्यूसर के पैसे बर्बाद हों। मैं ये बात कह भी सकता हूं कि मेरे साथ जिन भी निर्माताओं ने काम किया है उनके पैसे बर्बाद नहीं हुए हैं, मेरे साथ निर्माता ने कभी भी लॉस नहीं किया है। उन्होने कहा, मुझे याद है जब जामू सुगंध ने लगान फिल्म के बजट में निवेश करने का निर्णय लिया था तो वह मेरे लिए भी जिम्मेदारी थी कि मैं उनके साथ खड़ा रहूँ और मैं आपको बता रहा हूं कि मैं अब तो अपनी फिल्म की फीस भी नहीं लेता। जब सबके पास पैसे पहुंच जाते हैं। सबका फायदा हो जाता है तब मेरे हिस्से में पैसे आते हैं।

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आमिर ने कहा कि अगर कोई फिल्म 100 करोड़ रुपए में बनी है तो राइटर्स, टेक्निशीयंस, एक्टर्स के अलावा फिल्म में काम कर रहे हर शख्स को उसकी फिल्म उस 100 करोड़ रुपए में से मिल जाती है। जबकि मेरा पैसा शुरू में नहीं मिलता क्योंकि मैं फिल्म के प्रॉफिट का पार्टनर हूं। उसके बाद उसके विज्ञापन में अगर 25 करोड़ खर्च होते हैं तो बॉक्स ऑफिस पर सबसे पहले उसकी रिकवरी होती है। यानी 125 करोड़ रुपए की कमाई के बाद फिर उसके ऊपर से जो भी कुछ कमाई होती है उसमें से जो भी हिस्सा मेरा तय हुआ है वो मुझे मिलता है।

इसलिए निर्माता मेरे साथ काम करने से घबराते नहीं हैं। मेरी फीस फिल्म के मेकिंग पर भारी नहीं पड़ती है। इसलिए अगर कोई ये सोच रहा है कि मैं सबसे पहले पैसे लेता हूं तो ये गलत है। वास्तव में मुझे पैसा बाद में मिलता है, इसमें बड़ा रिस्क ये भी है कि फिल्म अगर बॉक्स ऑफिस पर नहीं चली तो मुझे मेरी फीस तक निकालना भारी पड़ सकता है।

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