सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने को लेकर हो रहे घमासान के बीच बॉलीवुड एक्टर और FTII चेयरमैन अनुपम खेर ने सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टियों और रेस्तरां में खड़े होने वाले सिनेमाघरों में राष्ट्रगान के लिए खड़े क्यों नहीं हो सकते.

उन्होंने कहा कि अगर लोग रेस्तरां में इंतजार कर सकते हैं, सिनेमाघरों में टिकट के लिए लंबी लाइन में खड़े हो सकते हैं, पार्टी में खड़े हो सकते हैं. तो फिर वे सिनेमाघरों में राष्ट्रगान के लिए महज 52 सेकंड तक खड़े क्यों नहीं हो सकते.

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अभिनेता ने कहा, कुछ लोगों का मानना है कि राष्ट्रगान के समय खड़े होना जरूरी नहीं होना चाहिए. लेकिन मेरे लिए राष्ट्रगान के वक्त खड़े होना उस व्यक्ति की परवरिश को दिखाता है. हम जिस तरह से अपने पिता या शिक्षक के सम्मान में खड़े होते हैं, ठीक उसी तरह राष्ट्रगान के लिए खड़ा होना अपने देश के प्रति सम्मान को दर्शाता है.

ध्यान रहे इससे पहले बॉलीवुड अभिनेत्री विद्या बालन और सीबीएफसी (सेंट्रल बोर्ड फॉर फिल्म सर्टिफिकेशन) की सदस्य विद्या बालन ने कहा था कि हम कोई स्कूल जाते बच्चे नहीं हैं कि दिन की शुरुआत राष्ट्र गान के साथ करेंगे. उन्होंने कहा था, देशभक्ति की भावना जबरदस्ती किसी पर नहीं थोप सकते. इसलिए मेरा व्यकिगत रूप से मानना है कि राष्ट्रगान नहीं बजाया जाना चाहिए.

आप को बता दें कि 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने थियेटरों में फिल्म शुरु होने से पहले राष्ट्रगान और दर्शकों के लिए खड़ा होना अनिवार्य कर दिया था. लेकिन अब कोर्ट ने इस सबंध में बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी के राष्ट्रगान नहीं गाने से वह देशद्रोही नहीं हो जाता या ये नहीं माना जा सकता है कि वो कम देशभक्त है.

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