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वरिष्ठ गीतकार एवं पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने गुरुवार (3 मई) को पाकिस्तान के संस्थापक मुहम्मद अली जिन्नाह की तस्वीर को लेकर कहा कि इस तस्वीर का एएमयू में लगा होना ‘‘शर्मिंदगी’’ की बात है.

उन्होंने कहा कि लेकिन जो लेाग इसके खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं उन्हें उन मंदिरों का विरोध भी करना चाहिए जो गोडसे के सम्मान में बनाए गए हैं. बता दें कि ये विवाद उस वक्त शुरू हुआ जब जब अलीगढ़ से सांसद सतीश गौतम ने एएमयू के छात्र संघ कार्यालय की दीवारों पर लगी इस तस्वीर का विरोध किया.

अख्तर ने ट्वीट किया, ‘जिन्ना अलीगढ़ में न तो छात्र थे और न ही शिक्षक. यह शर्म की बात है कि वहां उनकी तस्वीर लगी है. प्रशासन और छात्रों को उस तस्वीर को स्वेच्छा से हटा देना चाहिए. जो लोग उस तस्वीर के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं उन्हें अब उन मंदिरों के खिलाफ भी प्रदर्शन करना चाहिए जिन्हें गोडसे के सम्मान में बनाया गया.’

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हालांकि AMU प्रशासन ने तस्वीर को लेकर तर्क दिया कि तस्वीर वहां दशकों से लगी हुई है. एएमयू के प्रवक्ता शाफे किदवई नेकहा कि जिन्ना विश्वविद्यालय के संस्थापक सदस्य थे और उन्हें छात्र संघ की आजीवन सदस्यता दी गई थी. परंपरागत रूप से, छात्र संघ कार्यालय की दीवारों पर सभी आजीवन सदस्यों की तस्वीरें लगाई जाती हैं.

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