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बॉलीवुड ने कुछ गाने ऐसे सदाबहार दिए है जो आजतक अपनी चमक बरकरार रखे हुए हैं. चाहे वो मुगले आज़म के गाने हो या पाकीज़ा फिल्म का कर्णप्रिय संगीत. मुकेश के सदाबहार गीत आज भी बड़ी तदात में सुने जाते है. अपनी आवाज़ में दर्द पिरोये मुकेश ने एक से बढ़कर एक बेहतरीन गाने देकर बॉलीवुड पर जो अहसान किया उसका बदला शायद आज की पीढ़ी नही चूका सकती.

लेकिन आज हम बात करने जा रहे है मुकेश द्वारा गाये एक बेहद प्रसिद्ध गाने “आवारा हूँ”, जिसे राजकपूर की फिल्म ‘आवारा’ के लिए कंपोज़ किया गया था और संगीत दिया था शंकर-जयकिशन ने. शब्दों में पिरोया था शैलेन्द्र ने और अपनी मनमोहक आवाज़ से मुकेश ने इसे अमर बना दिया था. लेकिन अगर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही ख़बरों की माने तो यह गाना चोरी किया गया था, तुर्की की एक फिल्म से जो सन 1946 में आई थी.

जबकि राजकपूर अभिनीत फिल्म ‘आवारा’ 1951 में रिलीज़ की गयी थी. इस गाने में इतनी समानता है की संगीत से लेकर शब्द तक मैच कर जाते हैं. हालाँकि जब आप तुर्किश फिल्म के इस गाने को देखेंगे तो एक खास बात और सामने आएगी. एक और प्रसिद्ध गाना “घर आया मेरा परदेसी,प्यास बुझी मेरी अखियन की” का संगीत में सुनने में मिल जायेगा. और सबसे कमाल की बात यह गाना भी फिल्म आवारा में ही इस्तेमाल किया गया था.

हम यहाँ कुछ भी क्लेम नही कर रहे, दर्शकों की अपनी मर्ज़ी है की वो बताये की कौन सा गाना उन्हें असली लगता है और कौन चोर है ?

विडियो देखें :-

आवारा राजकपूर अभिनीत

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