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वरिष्ट पत्रकार रवीश कुमार

नई दिल्ली । देश में चल रहे #MeToo अभियान ने कई बड़ी बड़ी हस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया है। फ़िल्म जगत से लेकर राजनीतिक जगत में इस अभियान ने खलबली मचा दी है। मोदी सरकार के विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर के ऊपर भी कई महिला पत्रकारों ने आरोप लगाए है। फ़िलहाल सरकार इस मामले में चुप है तो विपक्ष अकबर से इस्तीफ़े की माँग कर रहा है। हालाँकि अकबर की ख़बर मीडिया में उतनी सुर्ख़ियाँ नही बटोर रही है जितनी आलोकनाथ की।

एनडीटीवी के मशहूर ऐंकर रविश कुमार ने भी कुछ ऐसे ही विचार व्यक्त किए है। उनका कहना है की प्रिंट मीडिया से अकबर की ख़बर को ग़ायब कर दिया गया है। इसके अलावा फ़ेस्बुक पोस्ट और यूट्यूब पर भी अकबर से सम्बंधित पोस्ट और विडियो को शेयर करने की रफ़्तार काफ़ी धीमी है। रविश ने हिंदी अखबारो पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा की हिंदी अख़बार, हिंदी पाठकों की हत्या कर रहे है।

रविश ने ये विचार अपने फ़ेस्बुक पेज पर एक पोस्ट के ज़रिए ज़ाहिर किए। उन्होंने ‘अकबर की ख़बर रोको, आयकर छापे की लाओ, कुछ करो,जल्दी भटकाओ’ नामक शीर्षक से लिखा,’ प्रिंट मीडिया में अकबर की ख़बर को ग़ायब कर दिया गया है। ज़िला संस्करणों के अख़बार में अकबर की ख़बर तीन चार लाइन की है। दो तीन दिन तो छपी ही नहीं। उन ख़बरों में कोई डिटेल नहीं है। एक पाठक के रूप में क्या यह आपका अपमान नहीं है कि जिस अख़बार को आप बरसों से ख़रीद रहे हैं वह एक विदेश राज्य मंत्री स्तर की ख़बर नहीं छाप पा रहा है?’

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ख़बरों पर किस तरह नियंत्रण किया जा रहा है इस पर लिखते हुए रविश ने कहा,’ आयकर छापे की खबर अकबर और रफाल डील की ख़बर को रोकने या गायब करने के लिए ज़रूरी है। फ्रांस के अख़बार मीडियापार्ट ने नई रिपोर्ट छापी है। दास्सो एविएशन के दस्तावेज़ों को देखकर बताया है कि भारत सरकार ने शर्त रख दी थी कि अनिल अंबानी की कंपनी को पार्टनर बनाने के लिए दबाव डाला गया था। यह अब तक का और भी प्रमाणित दस्तावेज़ है। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण फ्रांस ही गईं हैं। फ्रेंच मीडिया में इस तरह की बात छप रही हो और रक्षा मंत्री फ्रांस में हैं। सोचिए भारत की क्या स्थिति होगी। सरकार चुप है।’

पढ़िए रविश की पूरी रिपोर्ट 

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