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भारत में आये दिन अपराध होते हैं, चाहे वह छोटे अपराध हो, चाहे बड़े. चाहे कोई छोटी सी चोरी भी हो उसे भी अपराध में गिना जाता है, इन अपराधों के शिकार होने पर अक्सर लोग पुलिस में शिकायत दर्ज करवाते हैं, जिसके बाद पुलिस आगे की कारवाही करती है, आपको पुलिस में शिकायत दर्ज करने में और एफआईआर के बारे में कुछ जानकारियां पता होनी चाहिए जो जानकारियां आपको नीचे की पंक्तियों में दी जाएँगी.

फर्स्ट इनफार्मेशन रिपोर्ट 

किसी घटना के संबंध में पुलिस के पास कार्यवाई के लिए दर्ज की गई सूचना को फर्स्ट इनफार्मेशन रिपोर्ट कहा जाता है. यह सूचना प्रायः अपराध के शिकार व्यक्ति द्वारा पुलिस के पास एक शिकायत के रूप में दर्ज की जाती है. किसी अपराध के बारे में पुलिस को कोई भी व्यक्ति मौखिक या लिखित रूप में सूचित कर सकता है. FIR पुलिस द्वारा तैयार किया हुआ एक दस्तावेज है जिसमे अपराध की सुचना वर्णित होती है.सामान्यत: पुलिस द्वारा अपराध संबंधी अनुसंधान प्रारंभ करने से पूर्व यह पहला कदम अनिवार्य है.

केवल संघेय अपराधों तक है सम्बंधित 

FIR शब्द को आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 के तहत सीधे परिभाषित नहीं किया गया है.किसी भी संज्ञेय अपराध के संबंध में दी गई जानकारी पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी द्वारा दर्ज की जानी चाहिए. FIR केवल संज्ञेय अपराधों के साथ ही संबंधित है और यह गैर-संज्ञेय अपराधों के प्रावधान को शामिल नहीं करती है. यह सूचना पुलिस अधिकारी को कोई भी व्यक्ति दे सकता है या तो उस व्यक्ति ने घटना को देखा होगा या तो वह खुद घटना पीड़ित होगा.संज्ञेय अपराध की परिभाषा ऐसे अपराध के रूप में की गई है, जिसमें गिरफ्तारी के लिए पुलिस को किसी वारंट की जरूरत नहीं होती. संज्ञेय अपराध सामान्यतः गंभीर होते हैं जिनमें पुलिस को तुरन्त कार्य करना होता है. संज्ञेय अपराध मैं पुलिस बिना मेजिस्ट्रेट की आज्ञा अनुसंधान प्रारम्भ कर सकती है.

एक बार एफआईआर पंजीकृत होने के बाद शिकायतकर्ता को यह मुफ्त में उपलब्ध कराया जाना चाहिए. संज्ञेय अपराध ऐसे अपराध हैं जहां एक पुलिस अधिकारी आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 के अनुसूची 1 के अनुसार बिना वार्रेंट के गिरफ्तार कर सकता है.

पुलिस शिकायत 

जबकि पुलिस शिकायत या तो संज्ञेय अपराध या गैर-संज्ञेय अपराध के संबंध में एक शिकायत है . गैर-संज्ञेय अपराध को ऐसे अपराध के रूप में माना जाता है जहां एक पुलिस अधिकारी वारंट के बिना गिरफ्तार करने के लिए अधिकृत नहीं होता है.  पुलिस शिकायत का अर्थ अगर शब्दों में कहा जाए तो मौखिक रूप से किसी व्यक्ति पर लगाया गया आरोप है या मजिस्ट्रेट को लिखित रूप से इस इरादे से बताना की वह मजिस्ट्रेट आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1 9 73 के तहत एक कार्रवाई करेगा.

चोरी,हत्या का कर सकते हैं उल्लेख 

पुलिस शिकायत में चोरी, हत्या आदि के किसी भी अपराध का उल्लेख किया जा सकता है. यह सुनिश्चित करना चाहिए की जांच के दौरान मामलों को गंभीर और सत्य साबित होने पर पुलिस शिकायत को एफआईआर में भी परिवर्तित किया जा सकता है. एफआईआर पुलिस कार्यालय द्वारा दर्ज एक आपराधिक मामले में पहला बुनियादी कदम है और यह एक रिकॉर्ड है जिसमें अपराध का मूल ज्ञान होता है, जिसमें घटना की जगह, अपराध आयोग के समय और पीड़ित के बारे में जानकारी आदि दर्ज किया जाता है.

एफआईआर और पुलिस शिकायत 

एफआईआर अपराध से पीड़ित या किसी अपराध की घटना के गवाह या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा अपराध के मूल ज्ञान- जिसे घटना के बारे में सभी जानकारियां प्राप्त हो- से आसानी से रजिस्टर की जा सकती है. दूसरी ओर, शिकायत को आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 2 के तहत परिभाषित किया गया है जिसका अर्थ है कि एक तथ्य का आरोप जो शिकायत बनने का गठन करता है. सामान्य भाषा में हम कह सकते हैं की शिकायत किसी भी घटना या वस्तु को व्यक्त करता है.

एफआईआर और शिकायत के बीच के अंतर का मुख्य बिंदु

आपराधिक प्रक्रिया संहिता के तहत शिकायत को एक आरोप के रूप में कहा जा सकता है. जबकि एफआईआर परिभाषित नहीं है, लेकिन किसी भी संज्ञेय अपराध की घटना के बारे में पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी द्वारा दर्ज की गई जानकारी को संदर्भित करता है.

शिकायत के लिए कोई निर्धारित प्रारूप नहीं है लेकिन एफआईआर के लिए एक विशेष निर्धारित प्रारूप उपलब्ध है. शिकायत किसी भी अपराध के खिलाफ की जा सकती है, चाहे वह संज्ञेय या गैर-संज्ञेय हो लेकिन दूसरी तरफ, एफआईआर केवल संज्ञेय अपराध के खिलाफ पंजीकृत हो सकता है. अंत में, एक मजिस्ट्रेट को शिकायत की जाती है जबकि एफआईआरआर पुलिस स्टेशन के प्रभारी द्वारा पंजीकृत होता है.

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