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आजकल के दौर में तकनीक हमारी ज़िन्दगी का अहम् हिस्सा बन गयी है. इन्टरनेट हमारी ज़िन्दगी में इस तरह से अहम् है कि अगर कुछ वक़्त के लिए इन्टरनेट ना आये तो बेचैनी सी आ जाती है. सोशल मीडिया के दौर में दोस्ती, दुश्मनी, प्यार सब कुछ कंप्यूटर और इन्टरनेट की मदद से ही हो रहा है. देखा जाए तो ज़िन्दगी आसान सी हो गयी है लेकिन इसे मुश्किल बनाने के लिए कुछ लोग काम करते रहते हैं और हमारी प्राइवेट लाइफ में घुसने की कोशिश करते हैं, यही वजह है कि आजकल बड़ी मात्रा में साइबर क्राइम के मामले सामने आ रहे हैं. साइबर क्राइम को अगर आसान भाषा में समझने की कोशिश करें तो कोई भी ऐसा अपराध जो कंप्यूटर की मदद से किया गया हो, साइबर क्राइम कहलाता है. इस तरह के अपराध के लिए इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000 और भारतीय दंड संहिता में मौजूद दंडात्मक प्रावधानों का सहारा लिया जाता है.

क्या साइबर क्राइम की कोई परिभाषा है? साइबर क्राइम की क्या श्रेणियाँ हैं?
इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट,2000 में साइबर क्राइम की कोई विशिष्ट परिभाषा नहीं दी गयी है. साइबर क्राइम के अंतर्गत डाटा की चोरी,डाटा को नुक़सान पहुंचाना या कंप्यूटर से छेड़छाड़, कंप्यूटर सोर्स कोड से छेड़छाड़, या उसे ख़राब करने की कोशिश, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड से छेड़छाड़, किसी कम्युनिकेशन डिवाइस से आपत्तिजनक सन्देश भेजना, पहचान चुराना, प्राइवेसी का उल्लंघन करना, साइबर आतंकवाद और चाइल्ड पोर्नोग्राफी.

साइबर क्राइम को मुख्यतः तीन श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है. व्यक्ति के ख़िलाफ़ साइबर क्राइम, प्रॉपर्टी के ख़िलाफ़ और सरकार के ख़िलाफ़.

साइबर क्राइम की शिकायत दर्ज करने के लिए क्या करें?
आपको नाम, पता और टेलीफोन नंबर के साथ एक एप्लीकेशन लैटर साइबर क्राइम इन्वेस्टीगेशन सेल हेड को लिखना होगा.

शिकायतकर्ता को शिकायत करते समय निम्नलिखित दस्तावेजों को जमा करना होगा-
1. सर्वर लॉग्स
2. अगर वेबसाइट को नुक़सान पहुंचाया गया है तो ऐसे में वेबसाइट के विकृत (बिगड़े हुए) रूप की एक सॉफ्ट कॉपी और एक हार्ड कॉपी जमा करनी होगी. अगर पीड़ित के सर्वर या कंप्यूटर या किसी अन्य नेटवर्क से छेड़छाड़ की गयी है या डाटा कम्प्रोमाइज़ किया गया है तो ऐसे में ओरिजिनल डाटा की सॉफ्ट कॉपी और कम्प्रोमाइज़ डाटा की सॉफ्ट कॉपी जमा करनी होगी.
3. कंप्यूटर और ईमेल पर कौन कौन एक्सेस कर सकता था इसके बारे में भी पूरी जानकारी देनी होगी.
4. पीड़ित को किस-किस पर शक है, इसके बारे में सूचना देनी होगी.
5. किसी पर शक का क्या आधार है इस बारे में भी पूरी जानकारी देनी होगी जैसे-
क्या कोम्प्रोमाईज़ किया गया?
सिस्टम से किसने ऐसा किया हो सकता है ?
सिस्टम को कब कोम्प्रोमाईज़ किया गया?
इस तरह के हमले से कितने सिस्टम पर असर पड़ा?

साइबर क्राइम एक्ट के अंतर्गत क़ानूनी प्रावधान क्या हैं?
एक्ट की धारा 43 के अंतर्गत अगर किसी ने बिना इजाज़त किसी व्यक्ति के कंप्यूटर से छेड़छाड़ की, उसे नुक़सान पहुंचाने की कोशिश की तो उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है, इस सिलसिले में जुर्म करने वाले को क्षतिपूर्ती भी देनी पड़ सकती है.यदि बिना इजाज़त के कोई किसी के कंप्यूटर का प्रयोग करता है, उससे डाउनलोड करता है, डाटा की कॉपी करता है, कंप्यूटर में वायरस डालता है, उसे नुक़सान पहुंचाता है या कंप्यूटर सिस्टम को ख़राब करता है, औथोराइज़्ड यूजर की एक्सेस रोक देता है, ऐसे में जिस किसी को भी इससे नुक़सान होगा उसको जुर्म करने वाला क्षतिपूर्ति देगा. सेक्शन 43 में कंप्यूटर वायरस, कंप्यूट कनटामिनंट, कंप्यूटर डाटाबेस, और सोर्स कोड को वर्णित किया गया है.

संशोधन के बाद एक नयी धारा 43 A इसमें जोड़ी गयी है. इस धारा का उद्देश्य डाटा और जानकारी की सुरक्षा के लिए कॉर्पोरेट समूहों की ज़िम्मेदारी को तय करना है. इस सेक्शन के अनुसार, अगर कोई कॉर्पोरेट बॉडी लापरवाही करती है और इस लापरवाही की वजह से किसी व्यक्ति के डाटा के साथ छेड़छाड़ की जाती है तो इससे होने वाले किसी भी नुक़सान की भरपाई कॉर्पोरेट बॉडी को करनी होगी. इस धारा में बॉडी कॉर्पोरेट, उचित सुरक्षा प्रथा और प्रक्रिया, और संवेदनशील व्यक्तिगत डाटा और सूचना को परिभाषित किया गया है.

धारा 46 में साइबर क्राइम से निपटने के बारे में तरीक़ा बताया गया है. केंद्र सरकार इस बारे में किसी अधिकारी की नियुक्ति कर सकती है जो भारत सरकार में डायरेक्टर की रैंक से नीचे ना हो या राज्य सरकार में अधिनिर्णायक रैंक से नीचे का न हो. आईटी सेक्रेटरी के पास ये अधिकार हैं कि डाटा चोरी से सम्बंधित मामलों को वो अपने स्तर पर देखे.

धरा 65 के अंतर्गत कंप्यूटर सोर्स कोड से चोरी करना,उसे नुक़सान पहुंचाना, या कि छेड़छाड़ करना दंडनीय अपराध है, क़ानून इसमें तीन साल तक की क़ैद या दो लाख का जुर्माना या फिर दोनों की सज़ा दे सकता है. यहाँ कंप्यूटर सोर्स कोड का अर्थ प्रोग्राम की लिस्टिंग, कंप्यूटर कमांड, डिज़ाइन और लेआउट से है.

धारा 66 डाटा चोरी से सम्बंधित मामले जो धारा 43 के अंतर्गत आते हैं, उनमें सजा के प्रावधान पर चर्चा कारती है. अगर धारा 43 के अंतर्गत कोई जुर्म करता है तो उसे तीन साल की सज़ा या पांच लाख का जुर्माना या फिर दोनों की सज़ा हो सकती है.

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