defame

एक गरीब व्यक्ति से लेकर एक बड़े से बड़े व्यक्ति तक उसकी इज्जत उसके लिए बहुत माईने रखती है. कहा भी गया की व्यक्ति को अपनी इज्जत बनाने में वर्षो लग जाते है और इज्जत गवाने में एक मिनट ही काफी है. समाज में प्रत्येक व्यक्ति को ये अधिकार है की वो अपने प्रतिस्ठा, इज्जत, ख्याति और सामाजिक सम्मान को किसी भी तरह से ठेस पहुंचने से बचा सके और साथ ही अगर कोई व्यक्ति उसकी इज्जत और सौहरत के साथ खिलवाड़ करता है तो वह उसके खिलाफ न्यायालय ( कोर्ट ) में जा सकता है.

किसी व्यक्ति, व्यापार, उत्पाद, समूह, सरकार, धर्म या राष्ट्र के प्रतिष्ठा को हानि पहुँचाने वाला असत्य कथन मानहानि (Defamation) कहलाता है. अधिकांश न्यायप्रणालियों में मानहानि के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही के प्रावधान हैं ताकि लोग विभिन्न प्रकार की मानहानियाँ तथा आधारहीन आलोचना अच्ची तरह सोच विचार ही करें.

भारत में मानहानि एक नागरिक और अपराधिक अपराध दोनों है.

किसी भी व्यक्ति की बेइज्जती करना, समाज में उसको निचा दिखाने की कोशिस करना, उस पर कोई झूठा आरोप लगाना, झूठा बेईमान कहना, उसे गाली देना इतियादी मानहानि केस के अन्दर आते है और उसके लिए आरोप लगाने वाला व्यक्ति अपराधी की श्रेणी में आता है.

मानहानि के प्रकार / Types of Manhani case– मानहानि (manhani case) दो प्रकार से हो सकती है एक तो मौखिक रूप में जिसमे कोई व्यक्ति या संस्था किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाकर आधारहीन आलोचना कर सकती है या फिर प्रकाशन रूप में भी किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ उसकी छवि खराब करने के उद्देश्य से अगर कुछ publish किया जाता है जिसको पढ़कर या मौखिक रूप से की गयी टिप्पणी को सुनकर लोगो के मनो में किसी व्यक्ति विशेष के लिए घृणा का भाव उत्पन्न होता हो तो यह मानहानि की श्रेणी में आती है .

मानहानि के अनिवार्यता: हर अपराध की तरह, मानहानि की अनिवार्यता भी हैं जो निम्नलिखित हैं.

बयान दिया गया अपमानजनक होना चाहिए यानी यह एक ऐसे चरित्र का होना चाहिए जो दावेदार की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाए.

बयान में अभियोगी को संदर्भित करना चाहिए और व्यक्तिगत रूप से मानी जाने वाली सामान्य प्रकृति का नहीं होना चाहिए.

बयान प्रकाशित होना चाहिए, यह दावेदार के अलावा कम से कम एक व्यक्ति को सूचित किया जाना चाहिए.

यदि निम्नलिखित आवश्यक हैं तो मानहानि का अपराध किया जाता है.

भारत में मानहानि कानून

अपराध के रूप में मानहानि:

भारतीय दंड संहिता की मानहानि की धारा  499 ( defamation ipc 499 ) के अनुसार भारत के प्रत्येक व्यक्ति को अपन मान-सम्मान, शौहरत, यश इतियादी को सुरक्षित रखने का अधिकार है. अगर कोई व्यक्ति धारा 499 के अंतर्गत दोषी पाया जाता है तो उसको निम्न धाराओ के तहत दंड दिया जा सकता है.

धारा 500 : Defamation ipc 500  :अगर कोई व्यक्ति किसी दुसरे व्यक्ति की मानहानि करता है तो उसको धारा 500 के तहत 2 साल तक की कैद या आर्थिक जुर्माना या फिर ये दोनों सज़ा हो सकती है.

धारा 501 : Defamation ipc 501: जान बुझ कर किसी की मानहानि करने करने पर उसको धारा 500 के तहत 2 साल तक की कैद या आर्थिक जुर्माना या फिर ये दोनों सज़ा हो सकती है.

धारा 502 : Defamation ipc 502 :अपने आर्थिक उदेश्य के लिए किसी की मानहानि करने पर धारा 502 के तहत 2 साल तक की कैद या आर्थिक जुर्माना या फिर ये दोनों सज़ा हो सकती है.

धारा 505 : Defamation ipc 503 : किसी खबर, तथ्य और रिपोर्ट को इस तरह से पेश करना जिससे भारतीय जल, थल और वायु सेना का कोई भी सैनिक और अधिकारी विद्रोह या बगावत के लिए तैयार हो जाये. कोई भी ऐसी गलत जानकारी जिससे हमारे समाज में डर और भय का माहोल उत्पन्न हो जाये और लोगो सरकार के खिलाफ हो जाये. इस दोरान आरोपित व्यक्ति को धारा 505 के तहत 2 साल तक की कैद या आर्थिक जुर्माना या फिर ये दोनों सज़ा हो सकती है

मानहानि के खिलाफ बचाव: मानहानि के अपराध के खिलाफ कुछ बचाव शामिल हैं.

सार्वजनिक राष्ट्र को हमारे देश में अत्यंत महत्व माना जाता है. इसलिए, यदि जनता के लाभ और जागरूकता के लिए एक सच्चे अपमानजनक स्टैमेन बनाया जाता है, तो इसे अपमानजनक नहीं माना जा सकता है.

पत्रकारों को मानहानि के खिलाफ योग्य विशेषाधिकार दिया जाता है जिसका अर्थ है कि उन्हें मानहानि के मामले में तब तक शामिल नहीं किया जा सकता है जब तक उनके द्वारा किए गए बयान किसी को बदनाम करने के लिए उपयोग नहीं किये गए हो.

निष्पक्ष टिप्पणी का अपवाद किसी को एक अपमानजनक प्रकृति के बयान देने की इजाजत देता है जब तक कि बयान देने वाला व्यक्ति वास्तविक टिप्पणी कर रहा हो. निर्णय एक ऐसा होना चाहिए जो एक निष्पक्ष और समझदार व्यक्ति हो, भले ही ऐसी राय रखने का कारण शायद अजीब हो.

प्रारंभिक केस मूल्यांकन प्राप्त करें: यदि आप पर मुकदमे का आरोप लगाया गया है या किसी ने आपको बदनाम कर दिया है, तो यह सलाह दी जाती है कि आप ऐसे व्यक्ति के खिलाफ अपने अधिकारों के बारे में और जानें. एक वकील आपको स्थिति की सावधानीपूर्वक जांच करने में मदद कर सकता है और मुक़दमे के साथ आगे बढ़ने के लिए आपको सबसे उपयुक्त तरीका सुझा सकता है.

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