income tax

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से अगर कोई नोटिस आ जाए तो ये बड़ी उलझन वाली बात लगती है लेकिन इसमें परेशान होने की ज़रुरत नहीं है. हालाँकि ऐसा होता ही है कि जब नोटिस आता है तो डिपार्टमेंट की तरफ़ से पूछे गए सवालों पर लोग परेशान हो जाते हैं.

धारा 143(2) के अंतर्गत भेजा गया नोटिस स्क्रूटनी नोटिस कहलाता है. अगर आपको इस धारा के तहत नोटिस प्राप्त होता है तो इसका अर्थ है कि आपने जो आयकर भरा है उसकी व्यापक स्क्रूटनी की जायेगी. इसलिए इसमें परेशान होने की कोई ज़रुरत नहीं है बल्कि डिपार्टमेंट के द्वारा दिए गए दिशा-निर्देश का पालन करें. बिना हड़बड़ी दिखाए निर्धारण अधिकारी की बात सुने और उसके बताये निर्देशों के मुताबिक़ काम करें. सबसे पहली बात तो ये है कि जब भी नोटिस आये तो उसका जवाब समय रहते ही दे दें, इसे टालने की ग़लती ना करें.

निर्धारण अधिकारी इस नोटिस को कर-निर्धारण वर्ष समाप्त होने के 6 महीने बाद तक भेज सकता है.विस्तृत मूल्यांकन के लिए निर्धारण अधिकारी आपसे अकाउंट के लेखे-जोखे से सम्बंधित किताबों के बारे में पूछ सकता है. वो ट्रेडिंग स्टेटमेंट, लाभ-हानि खाते, बैलेंस शीत, बैंक स्टेटमेंट को देखने के लिए कह सकते हैं. आपको टैक्स डिपार्टमेंट की बात को ठीक से समझना है और डिपार्टमेंट का सहयोग करना है. निर्धारण अधिकारी से मांगी गयी जानकारी को साझा करें.

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इसके अतिरिक्त, करदाता को चाहिए कि वो अपने नर्धारण अधिकारी से संपर्क में रहे और जो भी दस्तावेज मांगे जाएँ वो दे. अगर आप ऐसा करने से चूक जाते हैं, तो आपको डिपार्टमेंट की तरफ़ से एक और नोटिस भेजा जा सकता है. अगर आप वेतनभोगी कर्मचारी हैं, तो आपके पास फॉर्म 16 होना चाहिए जोकि आपके नियोक्ता ने जारी किया होगा.

इसलिए ये ज़रूरी है कि जो भी ज़रूरी सुबूत और दस्तावेज हैं वो टैक्स डिपार्टमेंट को जमा करें.

अगर आप नोटिस का पालन करने से चूक जाते हैं-

ये एक्ट की धारा 144 के अंतर्गत “सर्वश्रेष्ठ मूल्यांकन निर्णय (Best Assessment Judgment)” में जा सकता है.

धारा 271(1)(b) के अंतर्गत जितनी बार नोटिस का पालन करने से आप चूकंगे, हर बार 10,000 का जुर्माना लग सकता है.

धारा 276D के अंतर्गत मुक़दमा चलाया जा सकता है जिसमें 1 साल तक की सज़ा जुर्माने के साथ या जुर्माने के बग़ैर हो सकती है.

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