Friday, August 23, 2019
हमने दुनिया का नक्शा बनते आैर बिगड़ते देखा है। ज्यादा वक्त नहीं गुजरा जब हिंदुस्तान के सीने पर भी परदेसी फौज के घोड़ों की टापें सुनार्इ देती थीं। हमने उन लोगों के किस्से भी किताबें में पढ़े हैं जिनकी तलवारें सिर्फ बेकसूर लोगों के खून से प्यास बुझाती थीं। मैं...
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मेरठ का खरखोदा कांड यह वह कांड था जिसे भाजपा ने 'लव जिहाद' कहकर सारे देश में गरमा दिया था। बलात्कार, किडनियों का निकाल लेना, अप्रहण कर जबरन धर्म परिवर्तन कराना इस तरह के आरोप मीडिया और भाजपा की तरफ से लगाये गये थे। जिस कलीम के ऊपर ये...
बाबरी मस्जिद---नाम है एक ज़ख्म का , जो आज भी हरा है ... एक घाव का , जो आज भी रिस रहा है .... एक धोखे का , जो इसी के नाम पर सुप्रीम कोर्ट को दिया गया था .... और यह नाम है एक मस्जिद का , जिसे...
हमने बचपन में पढ़ा था मकदूनिया का अलेक्जेन्डर 20 साल की उम्र में बादशाह बना था, और 23 साल की उम्र में मकदूनिया से निकला, उसने सबसे पहले यूनान फतह किया, उसके बाद वह तुर्की में दाखिल हुआ, फिर ईरान के दारा को शिकस्त दी, फिर वह शाम पहुंचा,...
यूं तो उनका संपूर्ण जीवन ही नेकी, भलाई, अमन और सच्चाई की मिसाल है, लेकिन उन्होंने अपनी जिंदगी के आखिरी हज में जो बातें कहीं वे हर इंसान के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। यह तब की बात है जब हिजरत का दसवां साल था। प्यारे नबी (सल्ल.) हज के लिए...
अफ़रोज़ आलम साहिल, TwoCircles.net पटना:महागठबंधन की जीत में अल्पसंख्यकों का एक रोल रहा है. नतीजों के बाद इस बात की पूरी उम्मीद थी कि मुसलमानों को उनके योगदान के अनुपात में हिस्सेदारी ज़रूर मिलेगी. मगर 28 मंत्रियों के मंत्रिमंडल में सिर्फ़ 4 मुसलमानों को ही हिस्सेदार बनाया गया. इससे एक...
कार्ल मार्क्स "विचारधारा" शब्द के ख़िलाफ़ थे. उनका मानना था कि विचारधारा बुर्जुआ/अभिजात (Bourgeois) वर्ग का अस्त्र है जिससे वह लोगो के मस्तिष्क पर क़ब्ज़ा करके उनका निरंतर शोषण करता है और समाज में अपनी दादागीरी को और ज़्यादा पुख्ता करता है.  बुर्जुआ वर्ग विचारधारा के ज़रिए अपना वर्चस्व...
उज्‍जल दोसांज विदेश में रहने वाले भारतीय जहां भी जमा होते हैं, वहां बातचीत का मुद्दा घूम-फिर कर आखिर भारत पर ही आ जाता है। भारत की तरक्‍की की बातें होती हैं और जात-पात, भ्रष्‍टाचार और गरीबी जैसे अभिशापों की चर्चा होती है। इन भारतीयों को भारत से लगाव...
रणधीर सिंह सुमन टीपू सुल्तान मैसूर का शासक था। उसने ईस्ट इंडिया कंपनी को कई बार पराजित किया था और टीपू सुलतान के खिलाफ निज़ाम हैदराबाद व मराठा, अंग्रेजों के साथ शामिल रहते थे। उसके बावजूद टीपू सुलतान हरा पाने में अंग्रेज असमर्थ थे और मजबूर होकर उन्होंने मंगलौर संधि...
नासिरूद्दीन हैदर यह जिन्न है, जो महागठबंधन के वोटों के रूप में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों से निकला. महागठबंधन में शामिल पार्टियों का जिन्न आमतौर पर प्रबुद्ध समाज और मीडिया को नहीं दिखता. शायद वह देखना भी नहीं चाहते. याद है, ऐसा ही जिन्न 1995 में भी निकला था. उस वक्त...

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