Monday, June 17, 2019
कार्ल मार्क्स "विचारधारा" शब्द के ख़िलाफ़ थे. उनका मानना था कि विचारधारा बुर्जुआ/अभिजात (Bourgeois) वर्ग का अस्त्र है जिससे वह लोगो के मस्तिष्क पर क़ब्ज़ा करके उनका निरंतर शोषण करता है और समाज में अपनी दादागीरी को और ज़्यादा पुख्ता करता है.  बुर्जुआ वर्ग विचारधारा के ज़रिए अपना वर्चस्व...
" अगर अमेरिका मेरे एक गुनाह की बात करता है , तो मेरे पास अमेरिका के गुनाहों की बहुत लम्बी फेहरिश्त है ". ये अल्फाज़ किसने कहे थे , यह तो याद नहीं मगर इतना ज़रूर है कि इतिहास का इससे बड़ा सच आज तक किसी ने नहीं कहा होगा और...
उज्‍जल दोसांज विदेश में रहने वाले भारतीय जहां भी जमा होते हैं, वहां बातचीत का मुद्दा घूम-फिर कर आखिर भारत पर ही आ जाता है। भारत की तरक्‍की की बातें होती हैं और जात-पात, भ्रष्‍टाचार और गरीबी जैसे अभिशापों की चर्चा होती है। इन भारतीयों को भारत से लगाव...
क्या यह हैरत और क्षोभ की बात नहीं है कि किसी भी आतंकवादी हमले के पीछे यदि किसी मुस्लिम संगठन का नाम आने की खबर अदना से अदना चेनल पर या न्यूज़ पेपर में शाया हो जाये तो आप उस पर आँख मूँद कर विश्वास कर लेते हैं ,...
An atmosphere of communal polarization, hate crimes, insecurity and violence is getting denser in the country. Political leaders seem to be promoting or patronizing it. The government is only running down the artists and writers. Freedom of expression is the foundation on which the structure of democracy has been...
रणधीर सिंह सुमन टीपू सुल्तान मैसूर का शासक था। उसने ईस्ट इंडिया कंपनी को कई बार पराजित किया था और टीपू सुलतान के खिलाफ निज़ाम हैदराबाद व मराठा, अंग्रेजों के साथ शामिल रहते थे। उसके बावजूद टीपू सुलतान हरा पाने में अंग्रेज असमर्थ थे और मजबूर होकर उन्होंने मंगलौर संधि...
नासिरूद्दीन हैदर यह जिन्न है, जो महागठबंधन के वोटों के रूप में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों से निकला. महागठबंधन में शामिल पार्टियों का जिन्न आमतौर पर प्रबुद्ध समाज और मीडिया को नहीं दिखता. शायद वह देखना भी नहीं चाहते. याद है, ऐसा ही जिन्न 1995 में भी निकला था. उस वक्त...
गुलामी प्रथा का इतिहास बहुत पुराना है। दुनिया के अलग-अलग देशों में इसका जिक्र आता है। एक जमाना था जब लोग गुलाम रखते थे और उन्हें इस रिवाज में कोई बुराई नजर नहीं आती थी। गुलाम भी इसे अपनी किस्मत का फैसला समझकर मंजूर कर लेते थे और इसी में...
क्या आरएसएस और आईएसआईएस एक हैं? इस सवाल से कई जुमले तैयार हो सकते हैं? भारतीय उदारवादी कितने उदार हैं? वे कितने वामपंथी हैं? या फिर भारत का वाम कितना उदार है? इतना ही नहीं, यह भी कि क्या देश का उदार विचार अप्रत्याशित खतरे में है? अगर ऐसा...
बाबरी से लेकर दादरी तक, और दादरी से लेकर मैनपुरी, ऊधम पुर, और वहां से लेकर हिमाचल प्रदेश फिर वहां से मणिपुर तक सबकुछ भीड़ तय कर रही है। बाबरी की भीड़ के बाद यह भीड़ पुणे के मोहसिन शेख हत्याकांड में दिखी थी उसके बाद जो सिलसिला शुरु...

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